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जन्नत मे ले जाने वालें 100 आमाल

अस्सलामू अलैकुम वरहमतुल्लाही वबरकातुहू वमग़फिरातुहू

☆☆जन्नत मे ले जाने वालें 100 आमाल☆☆

1. सच्चे दिल से गवाही देना: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही । [बुखारी]
2. गवाही देना: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही और मूहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं । [नसाइ]
3. नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मोहब्बत करना । [इब़्न असाकिर]
4. पांच वक्त की नमाजें अदा करना । [अबु दाऊद]
5. नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इताअत करना । [बुखारी]

6. हज मबरूर करना । [बुखारी]
7. अल्लाह की राह मे शहीद होना । [मुस्लिम]
8. रमज़ान के रोज़े रखना । [अहमद]
9. अपने मालों की ज़कात अदा करना । [अहमद]
10. गवाही देना: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही, वह अकेला है उसका कोई शरिक नही और मूहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अल्लाह के बन्दे और रसूल हैं । [मुस्लिम]

11. नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत से मोहब्बत करना । [इब़्न असाकिर]
12. बारा साल अज़ान देना । [इब़्न माजह]
13. अच्छी तरह वजू कर के अच्छे तरीक़े से दो रकात नमाज पढ़ना । [नसाइ]
14. वजू के बाद कलमा ए शहादत की गवाही देना । [अबु दाऊद]
15. अज़ान का जवाब देना । [मुस्लिम]

16. रास्ते से तकलीफ देने वाली चिज़ हटाना । [मुस्लिम]
17. रोज़ा रखना, जनाज़े मे शामील होना, मिस्कीन को खाना खिलाना और मरीज़ की इयादत करना । [मुस्लिम]
18. अल्लाह के लिये किसी से मोहब्बत करना । [तिर्मिजी]
19. अल्लाह की रज़ा के लिये शहर के कोने मे अपने भाई से मिलने जाना । [अल तरगीब]
20. मुसलमान से मुसाफा करना । [तिर्मिजी]

21. पियासे को पानी पिलाना । [बुखारी]
22. ज़बान और शर्मगाह की हिफाज़त करना । [तिर्मिजी]
23. हक़ पर होने के बावजूद झगड़ा छोड़ देना । [अबु दाऊद]
24. मज़ाक मे भी झूट नही बोलना । [अबु दाऊद]
25. अपने अखलाक को अच्छा बनाना । [अबु दाऊद]

26. जब बात करना तो सच बोलना । [अहमद]
27. जब वादा करना तो पुरा करना । [अहमद]
28. अपनी आँखो को निची रखना । [अहमद]
29. नर्मी, आसानी और क़रीब करना । [इब़्न हब्बान]
30. अच्छी बात करना और ख़ाना खिलाना । [इब़्न हब्बान]

31. अल्लाह पाक से ड़रना । [तिर्मिजी]
32. हया करना । [हाकिम]
33. लोगों पर रहेम करना । [अहमद]
34. यतीम की किफालत करना । [मुस्लिम]
35. कशरत से सजदा करना । [अहमद]

36. अल्लाह के खौफ से रोना । [तिर्मिजी]
37. सूरह एखलास से मोहब्बत करना । [हाकिम]
38. सलाम आम करना और अच्छी बात करना । [तबरानी कबिर]
39. अल्लाह पाक के फैसले पर राज़ी रहना । [अहमद]
40. अहले बैत से मोहब्बत करना । [बुखारी]

41. ज़्यादा खामोश रहना । [अबु याला]
42. अपने गुस्से पर क़ाबू रखना । [अबु याला]
43. रोज़ सौ मर्तबा पढ़ना: ला इलाहा इल्लल्लाहु वाहदहु ला शरिकलाहु लहुल मुल्कू वलाहुल हम्दु वहुव्वा अला कुल्ली शैइन कदीर । [बुखारी]
44. सुब्ह तीन मर्तबा कहना: मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर और मूहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नबी होने पर राज़ी हुँ । [तिर्मिजी]
45. क़र्ज माफ करना । [मुस्लिम]

46. सिलाह रहमी करना । [इब़्न माजह]
47. परेशान आदमी को छूट देना और अल्लाह की रज़ा के लिये दिया हुआ क़र्ज उस पर सदका कर देना । [तबरानी कबिर]
48. इल्म ए दीन हासिल करना । [मुस्लिम]
49. सुब्ह व शाम दस दस मर्तबा दुरूद पढ़ना । [जामे सगीर]
50. मोमीन मर्दों और औरतों के लिये दुआ ए मग्फिरत करना । [जामे सगीर]


51. ज़्यादा से ज़्यादा दुरूद शरीफ पढ़ना । [इब़्न हब्बान]
52. हर फर्ज़ नमाज के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ना । [अल तरगीब]
53. अल्लाह पाक से तीन मर्तबा जन्नत का सवाल करना । [तिर्मिजी]
54. मैय्यत को गुस्ल देना और कफन पहनाना । [अल तरगीब]
55. कुरआन मजीद पढ़ना । [मुस्लिम]

56. मुसलमान भाई की इज़्ज़त बचाना । [तिर्मिजी]
57. अच्छी और नेक बात करना । [मुस्लिम]
58. बुग़्ज और हसद से अपने दिल को साफ रखना । [अहमद]
59. मुसलमान भाई के ऐबों को छुपाना । [मुस्लिम]
60. लोगों के बीच सुलह करवाना । [तिर्मिजी]

61. मरीज़ की ज़ियारत करना । [तिर्मिजी]
62. सुब्ह या शाम मस्जिद की तरफ जाना । [मुस्लिम]
63. अपनी जवानी अल्लाह की इबादत मे गुज़ारना । [बुखारी]
64. छुपा कर सदका करना । [बुखारी]
65. अच्छी तरह वजू करना । [मुस्लिम]

66. नमाज फज्र और अस्र पढ़ना । [बुखारी]
67. अल्लाह पाक की खातीर चालीस दिन तकबीर ऊला से नमाज पढ़ना । [तिर्मिजी]
68. अल्लाह के लिये मस्जिद बनाना । [इब़्न माजह]
69. दिन मे बारा रकात नमाज सुन्नत पढ़ना: जुहर से पहले चार, जुहर के बाद दो, मगरीब के बाद दो, इशा के बाद दो और फज़्र से पहले दो । [नसाइ]
70. जुहर से पहले चार और उसके बाद चार रकातें अदा करना । [तिर्मिजी]

71. रात के वक्त दस आयात तिलावत करना । [अल तरगीब]
72. वजू कर के सोना । [इब़्न हब्बान]
73. विधवा और मिस्कीन की खबरगिरी करना । [बुखारी]
74. यतीम बच्चे की किफालत करना । [तबरानी औसत]
75. कुरआन मजीद हिफज़ [याद] करना । [तिर्मिजी]
आज़माइस पर सब्र करना । [अहमद]

76. अल्लाह के रास्ते मे पहेरा देना । [अल तरगीब]
77. अल्लाह की हराम की हुई चिज़ों को देखने से रूकना । [अल तरगीब]
78. महबुब तरीन साथी की मौत पर सब्र करना । [बुखारी]
79. मुसलमान की मुसिबत दुर करना । [मुस्लिम]
80. आखिरत के दिन पर ईमान लाना और लोगों के लिये वही पसंद करना जो अपने लिये पसंद करना । [मुस्लिम]

81. सदका करना । [बुखारी]
82. शहादत की सच्ची नियत करना । [मुस्लिम]
83. मैदान ए जिहाद मे रोज़ा रखना । [तिर्मिजी]
84. सवाब की नियत से रमज़ान का रोज़ा रखना । [बुखारी]
85. हर महीने तीन रोज़े रखना । [बुखारी]

86. माँ की खिदमत करना । [नसाइ]
87. बाप से हुस्न सुलूक करना । [इब़्न माजह]
88. बेटीयों की परव्रीस करना । [तिर्मिजी]
89. छोटे बच्चों की मौत पर सब्र करना । [बुखारी]
90. मुसिबत पर सब्र करना । [इब़्न माजह]

91. सुब्ह व शाम सैय्यदुल अस्तगफार पढ़ना । [बुखारी]
92. अल्लाह पाक से जन्नतुल फिरदौस का सवाल करना । [बुखारी]
93. ज़्यादा से ज़्यादा सजदा करना । [नसाइ]
94. अल्लाह की इबादत करना उस के साथ किसी को शरिक न ठहराना । [अहमद]
95. अल्लाह पर ईमान लाना और जिहाद करना । [इब़्न हब्बान]

96. सब्र करना और माफ करना । [इब़्न अबी शैबा]
97. अल्लाह और उस के रसूल को बाक़ी चिज़ों से ज़्यादा महबुब रखना । [नसाइ]
98. अल्लाह के लिये मोहब्बत करना और उसी के लिये बुग़्ज रखना । [अहमद]
99. अल्लाह के साथ किसी को शरिक न ठहराना और नाहक़ किसी को क़त्ल न करना। [हाकिम]
100. अल्लाह पाक के 99 नाम याद करना । [बुखारी]

अल्लाह पाक अमल करने की तौफीक अता फरमाऐ ।
आमीन

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Noor Saba

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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