Dua

तौहीद ए इबादत

तौहीद ए इबादत(उलुहियत) ये है के हर किस्म की इबादत को सिर्फ़ अल्लाह के लिये खास कि जाये और किसी दूसरे को उसमे शरीक न किया जाये कुरान मे इबादत को तो अलग-अलग तरीके से ब्यान किया ताकि इन्सान अगर किसी एक तरीके का भी करने वाला हैं तो ये जान ले के अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत जायज़ नही कुरान मे अल्लाह ने गैर अल्लाह की इबादत, सजदा, और परस्तिश की सख्ती से मज़म्मत की हैं इबादत के एक माने तो किसी की पूजा और परस्तिश के हैं जैसा के नीचे आयत से साबित हैं-
सूरज और चांद को सजदा न करो बल्कि उसको सजदा करो जिसने इन्हे पैदा किया हैं| अगर तुम वाकई अल्लाह की इबादत करने वाले हो| (सूरह हा0 मीम0 सजदा 41/37) ‪#‎अल_क़ुरान‬
दूसरे इबादत के माने किसी के हूक्मो की इताअत और ताबेदारी हैं जैसा के नीचे कुरान की आयत से साबित हैं-
ऐ आदम की औलादो! क्या मैने तुमको हिदायत न की थी के शैतान की इताअत न करना वह तुम्हारा खुला दुश्मन हैं| (सूरह यासीन 36/60)#अल_क़ुरान
पहली आयत के माने तौहीदे इबादत जैसे नमाज़, नमाज़ से जुड़ी और नमाज़ की तरह इबादते जैसे कयाम, रूकू, सजदा, सदका, खैरात, कुरबानी, तवाफ़, एतिकाफ़, दुआ, पुकार, फ़रियाद, मदद चाहना, खौफ़ सब की सब अल्लाह तालाह के लिये है..!!
दूसरे माने मे किसी की ताबेदारी(आज्ञापालन) हैं जैसे अल्लाह के अलावा किसी और के हुक्म को मानना जैसे अपनी नफ़्ज़ का मसला हो या किसी और का, मज़हबी पेशवा हो या सियासी रहनुमा, शैतान हो या कोई इन्सान अगर इन तमाम लोगो का हुक्म अल्लाह के हुक्म,कानून के मुख्तलिफ़ हैं तो ये भी अल्लाह की ज़ात मे शिर्क होगा..!!
कभी तुमने उस इन्सान के हाल पर गौर किया हैं जिसने अपनी नफ़्स को अपना रब बना लिया| (सूरह फ़ुरकान 25/43)#अल_क़ुरान
इसके अलावा एक दूसरी जगह अल्लाह ने फ़रमाया- बेशक शैतान अपने साथीयो के दिलो मे शक व शुबहात पैदा करते हैं ताकि तुमसे झगड़ा करे लेकिन अगर तुमने उनकी पैरवी कबूल कर ली तो तुम यकीनन मुश्रिक हो| (सूरह अनआम 6/121)#अल_क़ुरान
एक दूसरी जगह अल्लाह ने फ़रमाया- और जो लोग अल्लाह के नाज़िल करदा कानून के मुताबिक फ़ैसला न करे वही काफ़िर हैं| (सूरह माइदा 5/44)#अल_क़ुरान
लिहाज़ा अगर इबादत के दोनो मानो के सामने रख कर कुरान की रोशनी मे परखा जाये तो तौहीद ए इबादत यह होगी के नमाज़, रोज़ा, हज, ज़कात, सदकात, रुकू, सजूद, तवाफ़, एतिकाफ़, दुआ, पुकार, हुक्मो की इताअत व गुलामी, हुक्मो की इताअत और पैरवी सिर्फ़ अल्लाह ही के लिये हैं और इनमे से किसी एक काम के भी न करने से अमल शिर्क कहलायेगा..!!!
‪#‎इताअत_अल्लाह_व_रसूल‬ अल्लाह हुक्मो पर अमल करने की तौफीक दे..!!

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Noor Aqsa

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