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मोअतसम बिल्लाह ख़िलाफ़त अब्बासिया

मोअतसम बिल्लाह ख़िलाफ़त अब्बासिया के आठवें खलीफ़ा थे 218 हिजरी से 227 हिजरी तक ख़िलाफ़त पर कायम रहे
याकूब बिन जाफ़र बिन सुलैमान बयान करते हैं कि अमूरिया की जंग वह मोअतसम के साथ थे , अमूरिया की जंग का पसे मंजर भी इंतेहाई दिलचस्प है, एक प्रदादार मुसलमान औरत अमूरिया के बाजार में खरीदारी के लिये गयी, एक ईसाई दूकानदार ने उसे बेपर्दा करने की कोशिश की और खातून को एक थप्पड़ मार दिया,उसकी नौकरानी ने बेबसी के आलम में पुकारा__”वा मोअतसम”
ऐ मोअतसम !मेरी मदद को पहुँचों, सब दूकानदार हंसने लगे, उसका मजाक उड़ाने लगे कि सैकड़ों मील दूर से मोअतसम तुम्हारी आवाज़ कैसे सुनेगा __?
एक मुसलमान यह मंजर देख रहा था उसने खुद कलामी के अंदाज में कहा मैं इसकी आवाज को मोअतसम तक मैं पहुंचाऊंगा वह बगैर रुके दिन रात का सफर करता हूं मोअतसम तक पहुंच गया और उससे यह माजरा सुनाया यह सुनना था कि मोअतसम का चेहरा गुस्से से लाल हो गया वह बेचैनी से चक्कर लगाने लगा और चिल्लाने लगा और अपनी तलवार हाथ में लेकर ऊंची आवाज में कहने लगा मेरी बहन मैं हाजिर हूं मेरी बहन मैं हाजिर हूं उसने फौरन फ़ौज को तैयार करने का हुक्म दे दिया मुसलमानों की आमद से ख़ौफ़ज़दा होकर रोमी किला बंद होकर बैठे गये एक बद बदबख्त रूमी हर रोज किले की दीवार पर चढ़ता और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शान में गुस्ताखी करता मुसलमानों में शदीद गुस्सा फैल गया वह इतने फासले पर थे कि मुसलमानों के तीर वहां तक ना पहुंच पाते मजबूरन उसे उसके अंजाम से दो चार करने के लिए किला फतह होने का इंतजार करना पड़ा जबकि मुसलमानों की ख्वाहिश थी की उसे एक लम्हे से पहले जहन्नम रसीद कर दिया जाए याकूब बिन जाफर कहने लगे इंशा अल्लाह मैं उसे जहन्नम में पहुंचाऊंगा उन्होंने एक ऐसा तीर मारा जो सीधा उसकी शह रग में घुस गया वह गिरा तड़पा वस्ल -ए-जहन्नम हो गया मुसलमानों ने बुलंद आवाज से अल्लाह हो अकबर का नारा लगाया और उनमें खुशी की एक लहर दौड़ गई मोअतसम भी बहुत खुश हुआ उसने कहा तीर मारने वाले को मेरे पास लाया जाए याकूब बिन जाफर मोअतसम के पास पहुंचे तो उसने कहा गुस्ताखे रसूल को जहन्नम रसीद करने के अमल का सवाब मुझे फरोख्त करदो।
मैंने कहा अमीरूलमोमेनीन शवाब बेचा नहीं जाता,वह कहने लगे की अगर आप तैयार हो तो मैं एक लाख दिरहम देने को तैयार हूँ, मैंने कहा मैं शवाब नहीं बेचूंगा, वह कीमत बढाते रहे यहाँ की उन्होंने मूझे पांच लाख दिरहम तक की पेशकश करदी…
मैंने कहा कि अगर आप मूझे सारी दूनियाँ की दौलत दे दो तब भी मैं शवाब नहीं बेचूंगा ?
हाँ अलबत्ता मैं इस शवाब में से आधा हिस्सा आप को तोहफे में देता हूँ और इस बात की गवाह अल्लाह की पाक ज़ात है–मोअतसम कहने लगा अल्लाह पाक आप को इसका आला बदला अता फरमाये मैं राजी हूँ—
मोहादिरा तूल अबरा 2/63
किससुल अरब 3/449

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Noor Saba

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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