Islamic History

शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी को फत्ह की खुशखबरी

शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी को फत्ह की खुशखबरी
जिस रोज हुजूी ख्वाजा नवाज र0 अ0 की जबाने मुबारक से यह जुमला (वाक्य) निकला ‘मैने पृथ्वीराज को जिन्दा गिरफ्तार करके लश्करें इस्लाम के हवाले कर दिया। उसी रोज सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी को जो उन दिनों चाुरासान में था, ख्वाजा में बशारत हुई। देखता क्या है कि एक बा-खुदा बुजुर्ग सामने खड़े है और फरमा रहे है-‘ऐ शहाबुद्दीन! खुदइा-ए-तआला ने हिन्दुस्तान की सल्तनत तुझे अता फरमाई है, उठ, जल्द इस तरफ ध्यान दें और उस (घंमड़ी) राजा को जिंदा गिरफ्तार करके सजा दें। यह कहकर वह बुजुर्ग रूपोश हो गए। बादशाह जब ख्वाजा से बेदार हुआ (जागा) तो उसके दिल पर एक अजीब कैफियत थी और उसके कान में एक गैबी आवाज रह-रहकर आ रही थी, उठ, हिन्दुस्तान चल, सफलता तेरा इन्तिजार कर रही है।‘ सुल्तान ने अपना ख्वाब आलिमोें से बयान किया। सब ने एक जबान होकर सुलतान को मुबाकरबाद दी और फत्ह की खुशखबरी सुनाई।
शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी हिन्दुस्तान के मोर्चे पर सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी को एक साल पहले तरावजी के मैदान में पृथ्वीराज के मुकाबले में शर्मनाक शिकस्त (हरा) हुई थी और मुश्किल से जान बचाकर गजनी पहुंचा था। इन्तिकाम की आग उसके दिल में भड़क रही थी और गुप्त रूप से लड़ाई की तैयारियां कर रहा था, लेकिन किसी को यह उम्मीद न थी कि इस कदर जल्द वह हिन्दुस्तान के मोर्चे पर रवाना हो जायेगा। सुल्तान के मुबारक ख्वाब ने उसके दिल में एक नया जोश पैदा कर दिया था। आलिमों से अपने ख्वाब की तबीर सुनते ही उसने लड़ाई के सामान की फेहरिस्त (सूची) मंगवा कर देखी और लश्कर के कूच का डंका बजवा दिया और आठवें दिन खुद रिकाब में पैर रखकर रवाना हुआ। सभी अफसर हैरत में थे कि इस कदर जल्द तैयारी की क्या वजह हुई और लश्कर किस मोर्चे पर जा रहा है मगर किसी की हिम्मत न हुई कि सुल्तान से मालूम करे। जब यह लश्कर पेशावर में आकर ठहरा तो शाही खानदान के एक उम्र रसीदा शख्स ने सुल्तान की खिदमत में हाजिर होकर अर्ज किया-‘ हुजूर इस मोर्चे में सामान तो जंगे अजीम (महायुद्व) का दिखाई देता है लेकिन यह नही खुलता कि जाना किधर है ?‘
सुल्तान ने एक ठंडी आह भरी और जाब दिया। ऐ बुजुर्ग! तुमको मालूम नही है कि मुझ पर क्या गुजरी, क्या तुझे पिछले साल की हार नही रही ?
क्या यह हार इस्लाम के नाम पर कोई मामूली सा धब्बा है ?
तू यकील कर कि उस दिन से मैंने आज तक कपड़े बदले है और न महल सरा में बिस्तर पर सोया हूं। बुजुर्ग ने यह सुनकर शहाबुद्दीन गौरी की हिम्मत बढ़ाई और उसको दुआये दी, फत्ह का यकीन दिलाया और फरमाया-‘ अगर हुजूर का यही इरादा हे तो मसलहते वक्त को देखते हुए काम करना चाहिए। आप उन अमीरों और सरदारों के कुसूर माफ कर दें और उन्हें दरबार में बुलाकर इनाम व इकराम से मालमाल करें ताकि वह जान की बाजी लगाकर लड़े और पिछली बदनामी का धब्बा मिटा दें। सुल्तान को बुजुर्ग का यह कीमती और सही मश्विरा बहुत पसन्द आया। जब लश्कर मुलतान पहुंचा तो सुलतान ने दरबारे आम लगाया और छोटे-बड़े सभी अमीरों और सरदारों को बुलाया, उनकी गलतियां माफ करके उनसे कहा-‘ऐ मुसलमानो ! पिछले साल बदनामी का जो धब्बा इसलाम के माथे पर लगा है वह किसी से छुपा नही है इसलिए हर मुसलमान का यह फर्ज है कि उस कलंक के टीके को अपनी तलवार के पानी से धो कर साफ करें। सभी सरदारों ने अपनी तलवारों के कब्जे पर हाथ रखकर झुका दिइया, जैसे जबाने हाल से कह रहे थे कि हमारा वायदा पक्का है और हम उसे आखिरी सांस तक निभायेंगे।
पृथ्वीराज को सुल्तान का पैगाम सुलतान शहाबुद्दीन मुलतान से रवाना होकर लाहौर पहंचा वहां से रूकनुद्दीन को जो अक्ल व तद्बीर में अपना जवाब नहीं रखता था, सफीर (सन्देशवाहक) बनाकर राजा पृथ्वीराज के पास अजमेर भेजा। पृथ्वीराज के नाम जो पैगाम सुलतान ने भेजा था उसका मज्मून था-‘मै अपने बड़े भाई के हुक्म से जो पंजाब से लेकर खुरासान तक सभी मुसलमानों का बादशाह है हिन्दुसतान पर लश्कर कशी करने के लिए आया हूं इसलिए पृथ्वीराज को जो हिन्दुसतान के राजाओं का महाराजा है लिखा जाता है कि वह इस्लाम को कुबूल करके राज्य में खून-खराबा न होने दे वरना लड़ाई के लिए तैया हो जाये। पृथ्वीराज की नजरो जब यह पैगाम गुजरा तो उसकी कोई परवाह नही की और बहुत सख्त जवाब दिया क्योकि उसको अपनी बहादुरी और राजपूत सूरमाओं प बहुत नाज था। उसको अपनी सफलमा सामने ही नजर आ रही थी। लड़ाई की तैयारी में लग गया तुरन्त सभी हिन्दुस्तान के राजाओं को संदेश जारी कर दिया। थोडे ही समय में तीन लाख राजपूतों का लश्कर इसके झन्डे के नीचे आ जमा। सुल्तान मुहममद गौरी उधर से बढ़ा इधर से पृथ्वीराज की संयुक्त फौज चली और सरस्वती नदी को बीच में डालकर दोनो लश्करों ने अपने-अपने खेमे लगा दिये। उसी समय सुलमान के पास पृथ्वीराज का जवाब भी आ गया जिसका मज्मून यह था-
‘इस्लाम के सिपहसलार को उसके जासूसों द्वारा मालूम हो गया होगा कि धर्म रक्षा के लिए हमारे पास आसमान के तारो से भी ज्यादा लश्कर मौजूद है और सभी हिन्दुस्तान के कोने-कोने से फौजों का आना जारी है, इनमें से एक-एक राजपूत ऐसा बहादुर है जिसकी तलवार से काबूल और कन्धार तक ने पनाह मांगी है। तुम इन तुर्क बचचों और अफगान जवानों की जवानी पर रहम खाते हुए यहां से वापस लौट जाओं। इसी में तुम्हारी भलाई है वरना देख लो हमारे पास वेशुमार लड़ाई का सामान मौजूद है और जंगी हाथी भी तीन हतार से कुछ ऊपर है। अगर मेरी राय मन्जर है तो ठीक वरना याद रखो तुम्हारा एक सिपाही भी यहां से जिन्दा वापस जाने में कामियाब नही होगा।‘
सुलतान शहाबुद्दीन यह खत पढ़कर सुसत पड़ गया। दुश्मन की बेशुमार फौज और अपनी गिनत की फौज उसके सामने थी। अतः उसने जंगी चाल से काम लेते हुए राजा को जवाब में लिखा-‘आपने बड़ी मेहरबानी और मुहब्बत से अच्छा मश्विरा दिया है। मगर आपका मालूम है कि मैनेे यह लश्कर कशी अपने बड़े भाई के हुक्म से की है जब तक वहां से हुक्म न आ जाये, मै कुछ नही कर सकता। इसलिए वहां से जवाब आने तक मुहलत चाहता हं
राजा ने जब कमजोर जवाब को सुना तो बहुतम खुश हुआ, उसके तमाम लश्कर में खुशी मनाई गयी और नाच व रंग का बाजार गर्म हो गया।
फैसला कुन जंग शहाबुद्दीन गौरी ने दुरूमन को गफलत में पाकर पूरा-पूरा फायदा उठाया और शाम से ही लश्कर बन्दी का हुक्म दे दिया। खेमों और ढेरो को उसी हालत में छोड़कर रातों रात कई मील का चक्कर काटकर पूरे लश्कर के साथ नदी से पार उतर गया। उस वक्त राजा को होश आया अज्ञैर उसके लश्कर में खलबली मच गयी। राजा ने होश हवास को कायम रखा और एक हिस्सा फौज को तुरन्त तैयार करके सामने ले आया फिर बाकी फौज को भी समेट कर मैदान में ला खड़ा किया। राजा की फौज में तीन हजार हाथी तीन लाख सवार और बेशुमार पैदल थे। उधर सुलतान शहाबुद्दीन के पास सिर्फ एक लाख बीस हजार का लश्कर था। इसलिए राजा को अपनी कामियाबी का पूरा-पूरा यकीन था। इसलिए उसने लश्कर की तर्तीब पर कोई खास ध्यान नही दिया। सारी फौज को एक ही समय में हमले का हुक्म दें दिया उधर सुल्तान ने तर्कीब से काम लेते हुए अपनी फौज के चार हिस्से किये और हर एक पर अलग-अलग सिपहसालार मुकर्रर करके बारी-बारी जाकर लड़ने का हुक्म दे दिया। राजपूत इस बहादुरी से लड़े कि सुलतान की फौज के छक्के छूट गये। उस वक्त सुल्तान एक जंगी चाल चला यानी हार की सूरत बनाकर पीछे हटा राजपूतों ने पीछठा किया सुल्तान ने जब यह देखा कि उनकी तर्तीब बिगड़ चुकी है, तो उसने दूसरे ताजा दम लश्कर को मैदान में ला खड़ किया लेकिन राजा की फौज बुशुमार थी, सुलतान की चाल कारगर न हुई। लड़ते-लड़ते दोपहर का समय हो गया, सूरज सर पर आ गया, गर्मी का मौसम था और जंग थी के खत्म न होती थी। राजा पृथ्वीराज एक सौ पचास राजाओं को साथ लेकर लश्कर से निकला अज्ञैर एक पेड़ के साये में पहुचकर तय किया कि अब एक फैलाकुन जंग लड़ी जाये। इस पर सब ने तलवारों के कब्जे पर हाथ रखकर धर्म और देश पर कट करने की कसम खाई, शरबत का एक-एक प्याला पिया, तुलसी की पत्ती जबान पर रखी और केसर का टीका अपने माथे पर लगाया और ताजा दम होकर मैदान में आ गये। अब घमासान की लड़ाई शुरू हो गयी। राजा की फौज सुबह से लड़ते-लड़ते थक चुकी। सुलतान मोका पाकर अपने बारह हजार तलवारबाज बहादुरों को लकर जो इसके खास गुलाम थे और अब तक जंग में नही गये थे लश्कर से निकला और इस तेजी से हमला किया कि आन की आन में राजा की फौज के बीच में घुस गया। सुलतान के दूसरे सरदारों को भी यह देखकर जोश आ गया और वह भी दायें-बाये जोर देकर राजा की फौज पर टूट पड़े। ताजा दम दसते का मुकाबला राजा की थकी हुई फौज के बस से बाहर था। देखते ही देखते हजारो राजपूत तलवार के घाट उतर गये और राजा की फौज मं हचचल मच गयी। उधर जंगी हाथी जिन पर राजा को बड़ नाज था अपनी ही फौज पर उलट पड़े और हजारो को कुचल डाला। राजपूत सूरमाओं ने बड़ा संभाला लियर मगर उनके बनाए क्या बनता था। गरीब नवाज र0 अ0 की कौल (कथन) पूरा होना था और होकर रहा। अभी थोड़ा दिन बाकी था कि राजा की फौज के पैर उखउ़ गये और सुलतान शहाबुद्दीन की फौज उन पर छा गई। खांडे राव मैदाने जंग में मारा गया और बहुत से हिन्दुस्तान के राजा इस लड़ाई में काम आ गये बाकी अपनी जान बचाकर भागने में कामियाब हो गये। पृथ्वीराज भी जान बचाकर भागना चाहता था मगर दरिया-ए-सरस्वती के किनारे गिरफ्तार कर लिया गया। आखिरकार शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी की फत्ह हुई और इस जंग से उतरी हिन्दुस्तान पर मुसलमानों का कब्जा पूरी तरह से हो गया उसके बाद सरस्वती, सामाना, कोहराम और हांसी की राजपूत रियासते आसानी से जीत ली गयी। अब सुल्तान ने अजमेर का रूख किया। रास्ते में कोई मुकाबला नही हुआ बल्कि मरे हुए राजाओं के बेटों ने सुल्तान का शानदार इस्तकबाल (स्वागत) किया और उसकी शरण में आ गये। सुलतान ने अजमेर पहुंच कर यहां की हुकुमत पृथ्वीराज के एक बेटे कोला को दी और उससे वफादारी का हलफ लिया। सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी सरकार गरीब नवाज र0अ0 के कदमों में जिस वक्त शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी अजमेर में दाखिल हुआ तो शाम का वक्त था और सूरज डूब रहा था। इतने में अजान की आवाज आई। सुलतान हैरत में पड़ गया और मालूम किया कि यह आवाज कहां से आ रही है। लोगों ने बताया कि कुछ फकीर आये हुए है और रोज पांच वक्त इसी तरह पुकारते है। सुल्तान अजान की तरफ बढ़ा। जमाअत तैयार थी सुल्तान जमाअत में शामिल हो गया। सरकार गरीब नवाज र0 अ0 इमामत फरमा रहे थे। जब नमाज खत्म हुई और सुल्तान की नजर सरकार गरीब नवाज र0 अ0 के चेहरे मुबारक पर पड़ी तो उसके हैरत की कोई इन्तिहा न रही उसने देखा कि ये वही बुजुर्ग हैं जिन्होने मुझे ख्वाजा में फत्ह की खुशखबरी दी थी, तुरन्त कदमों में गिरना चाहा लेकिन सरकार ने सुलतान को सीने से लगा लिया। सुल्तान आंखो में आंसू आ गये और बहुत देर तक रोता रहा। सरकार गरीब नवाज र0अ0 ने दुआयें देकर बैठने को कहा। सुल्तान एक तरफ अदब से बैठ गया। जब रोना कम हुआ तो अकीदत व मुहब्बत का नजराना पेश करते हुए मुरीद होने की इल्तिजा की। सरकार गरीब नवाज र0 अ0 ने सुल्तान शहाबुद्दीन की दरख्वास्त मंजूर करते हुए उसको अपने मुरीदों में शामिल कर लिया। कुछ दिन अजमेर में रहकर सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी ने खुद जाकर दहेली पर कब्जा किया और अपने वफादार गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को हिन्दुस्तान का गवर्नर बनाकर वापस गजनी चला गया। कुतुबुद्दीन ऐबक ने मुल्क के बाकी हिस्सों को फत्ह करने में हैरतअगंज कामियाबी हासिल की और बहुत जल्द उतरी हिन्दस्तान पर मुसलमानों का कब्जा हो गया।
एक राजा हरिराज ने अजमेर से पृथ्वीरात के बेटे को निकाल बहार किया। उसने कुतुबुद्दीन ऐबक से फरियाद की। कुतुबुद्दीन ऐबक ने राजा हरिराज पर चढ़ाई करके उसको कत्ल किया और कोला फिर अजमेर का राजा बन गया लेकिन इसके साथ ही मीरां सैयद हुसैन र0 अ0 को अपना नयाब बनाकर भेजा जो बडे परहेजगार बुजुर्ग थे। मीरां सैयद हुसैन मशहदी र0 अ0 पहले ही से सरकार गरीब नवाज र0 अ0 के अकीदतमन्द थे और अब इस कदर अकीदत बढ़ गयी कि ज्यादा वक्त सरकार गरीव नवाज र0 अ0 की खिदमत में बसर होता था। आपने इस्लाम फैलाने में नुमायां हिस्सा लिया।

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Shaheel Khan

As-salam-o-alaikum my selfshaheel Khan from india , Kolkatamiss Aafreen invite me to write in islamic blog i am very thankful to her. i am try to my best share with you about islam.
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