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सूरए बक़रह – बीसवाँ रूकू

बेशक आसमानों (1) और ज़मीन की पैदायश और रात व दिन का बदलते आना और किश्ती कि दरिया में लोगों के फ़ायदे लेकर चलती है और वह जो अल्लाह ने आसमान से पानी उतार कर मुर्दा ज़मीन को उससे ज़िन्दा कर दिया और ज़मीन में हर क़िस्म के जानवर फैलाए और हवाओ की गर्दिश (चक्कर) और वह बादल कि आसमान व ज़मीन के बीच में हुक्म का बांधा है इन सब में अक़लमन्दों के लिये ज़रूर निशानियां हैं (164) और कुछ लोग अल्लाह के सिवा और माबूद बना लेते हैं कि उन्हें अल्लाह की तरह मेहबूब रखते हैं और ईमान वालों को अल्लाह के बराबर किसी की महब्बत नहीं, और कैसी हो अगर देखें ज़ालिम वह वक्त़ जबकि अज़ाब उनकी आंखों के सामने आएगा इसलिये कि सारा ज़ोर अल्लाह को है और इसलिये कि अल्लाह का अज़ाब बहुत सख़्त है (165) जब बेज़ार होंगे पेशवा अपने मानने वालों से (2) और देखेंगे अज़ाब और कट जाएंगी उनसब की डोरें (3)(166) और कहेंगे अनुयायी काश हमें लौट कर जाना होता (दुनिया में) तो हम उनसे तोड़ देते जैसे उन्होंने हमसे तोड़दी, यूंही अल्लाह उन्हें दिखाएगा उनके काम उनपर हसरतें होकर (4) और वो दोज़ख से निकलने वाले नहीं(167)
तफ़सीर : सूरए बक़रह – बीसवाँ रूकू
(1) काबए मुअज़्ज़मा के चारों तरफ़ मुश्रिकों के 360 बुत थे, जिन्हें वो मअबूद मानते थे. उन्हें यह सुनकर बड़ी हैरत हुई कि मअबूद सिर्फ़ एक है, उसके सिवा कोई मअबूद नहीं. इसलिये उन्होंने हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से ऐसी आयत तलब की जिससे अल्लाह के एक होने पर सही दलील हो. इस पर यह आयत उतरी. और उन्हें बताया गया कि आसमान और उसकी बलन्दी और उसका बिना किसी खम्भे और इलाक़े के क़ायम रहना, और जो कुछ उसमें नज़र आता है, चाँद सूरज सितारे वग़ैरह, ये तमाम और ज़मीन और इसका फैलाव और पानी पर टिका हुआ होना और पहाड़, दरिया, चश्मे, खानें, पेड़ पौधे, हरियाली, फल और रात दिन का आना जाना घटना बढ़ना, किश्तियाँ और उनका भारी बोझ और वज़न के साथ पानी पर चलते रहना और आदमियों का उनपर सवार होकर दरिया के चमत्कार देखना और व्यापार में उनसे माल ढोने का काम लेना और बारिश और इससे ख़ुश्क और मुर्दा हो जाने के बाद ज़मीन का हरा भरा करना और नई ज़िन्दगी अता करना और ज़मीन को क़िस्म क़िस्म के जानवरों से भरदेना, इसी तरह हवाओं का चलना और उनकी विशेषताएं और हवा के चमत्कार और बादल और उसका इतने ज़्यादा पानी के साथ आसमान और ज़मीन के बीच टिका रहना, यह आठ बातें हैं जो क़ुदरत और सर्वशक्तिमान अल्लाह के इल्म और हिकमत और उसके एक होने को साबित करती हैं. ये चीज़ें ऊपर बयान हुई ये सब संभव चीज़े हैं और उनका अस्तित्व बहुत से विभिन्न तरीक़ों से मुमकिन था. मगर वो मख़सूस शान से अस्तित्व में आईं. यह प्रमाण है कि ज़रूर उनके लिये कोई ईजाद करने वाला भी है. सर्वशक्तिमान अल्लाह अपनी इच्छा और इरादे से जैसा चाहता है बनाता है, किसी को दख़ल देने या ऐतिराज की मजाल नहीं. वो मअबूद यक़ीनन एक और यकता है, क्योंकि अगर उसके साथ कोई दूसरा मअबूद भी माना जाए तो उसको भी यह सब काम करने की शक्ति रखने वाला मानना पड़ेगा. असरदार बनाए रखने में दोनों एक इरादा, एक इच्छा रखने वाले होंगे या नहीं होंगे. अगर हों, तो एक ही चीज़ की बनावट में दो असर करने वालों को असर करना लाज़िम आएगा और यह असम्भव है. और अगर यह फ़र्ज़ करो कि तासीर उनमें से एक की है, तो दूसरे की शक्तिहीनता ठहरेगी, जो मअबूद होने के ख़िलाफ़ है. और अगर यह होगा कि एक किसी चीज़ के होने का इरादा करे और दूसरा उसी हाल में उसके न होने का, तो वह चीज़ एक ही हाल में मौजूद या गै़रमौजूद या दोनों न होगी. ज़रूरी है कि या मौजूदगी होगी या ग़ायब, एक ही बात होगी. अगर मौजूद हुई तो ग़ायब का चाहने वाला शक्तिहीन ठहरे और मअबूद न रहे, और अगर ग़ायब हुई तो मौजूद का इरादा करने वाला मजबूर रहा, मअबूद न रहा. लिहाज़ा यह साबित हो गया कि “इलाह” यानी मअबूद एक ही हो सकता. (2) यह क़यामत के दिन का बयान है, जब शिर्क करने वाले और उनके सरदार, जिन्होंने उन्हें कुफ़्र की तरफ़ बुलाया था, एक जगह जमा होंगे और अज़ाब उतरता हुआ देखकर एक दूसरे से बेज़ार हो जाएंगे. (3) यानी वो सारे सम्बन्ध जो दुनिया में उनके बीच थे, चाहे वो दोस्तीयाँ हों या रिश्तेदारीयाँ, या आपसी सहयोग के एहद. (4) यानी अल्लाह तआला उनके बुरे कर्म उनके सामने करेगा तो उन्हें काफ़ी हसरत होगी कि उन्होंने ये काम क्यों किये थे. एक क़ौल यह है कि जन्नत के मक़ामात दिखाकर उनसे कहा जाएगा कि अगर तुम अल्लाह तआला की फ़रमाँबरदारी करते तो ये तुम्हारे लिये थे. फिर वो जगहें ईमान वालों को दी जाएंगी. इसपर उन्हें हसरत और शर्मिन्दगी होगी.

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Shaheel Khan

As-salam-o-alaikum my selfshaheel Khan from india , Kolkatamiss Aafreen invite me to write in islamic blog i am very thankful to her. i am try to my best share with you about islam.
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