Quran

सूरए बक़रह _ नवाँ रूकू

और जब तुमने एक ख़ून किया तो एक दूसरे पर उसकी तोहमत (आरोप) डालने लगे और अल्लाह को ज़ाहिर करना था जो तुम छुपाते थे तो हमने फ़रमाया उस मक्त़ूल को उस गाय का एक टुकड़ा मारो (1)अल्लाह यूं ही मुर्दें ज़िन्दा करेगा और तुम्हें अपनी निशानियां दिखाता है कि कहीं तुम्हें अक्ल़ हो (2)फिर उसके बाद तुम्हारे दिल सख्त़ हो गये (3)तो वह पत्थरों जैसे है बल्कि उनसे भी ज्य़ादा करें और पत्थरों में तो कुछ वो हैं जिनसे नदियां बह निकलती हैं और कुछ वो है जो फट जाते हैं तो उनसे पानी निकलता हैं और कुछ वो हैं जो अल्लाह के डर से गिर पड़ते हैं (4)और अल्लाह तुम्हारे कौतुकों से बेख़बर नहीं तो ऐ मुसलमानों, क्या तुम्हें यह लालच है कि यहूदी तुम्हारा यक़ीन लाएंगे और उनमें का तो एक समूह वह था कि अल्लाह का कलाम सुनते फिर समझने के बाद उसे जान बूझकर बदल देते (5) और जब मुसलमानों से मिलें तो कहें हम ईमान लाए (6)और जब आपस में अकेले हो तो कहें वह इल्म जो अल्लाह ने तुम पर खोला मुसलमानों से बयान किये देते हो कि उससे तुम्हारे रब के यहाँ तुम्हीं पर हुज्जत (तर्क) लाएं, क्या तुम्हें अक्ल़ नहीं क्या नहीं जानते कि अल्लाह जानता है जो कुछ वो छुपाते हैं और जो कुछ वो ज़ाहिर करते हैं और उनमें कुछ अनपढ़ हैं कि जो किताब (7)को नहीं जानते मगर ज़बानी पढ़ लेना(8)या कुछ अपनी मनघड़त और वो निरे गुमान (भ्रम) में है तो ख़राबी है उनके लिये जो किताब अपने हाथ से लिखें फिर कह दें ये ख़ुदा के पास से है कि इसके बदले थोड़े दाम हासिल करें (9)तो ख़राबी है उनके लिये उनके हाथों के लिखे से और ख़राबी उनके लिये उस कमाई से और बोले हमें तो आग न छुएगी मगर गिनती के दिन (10)तुम फ़रमादों क्या ख़ुदा से तुमने कोई एहद (वचन) ले रखा है?
जब तो अल्लाह कभी अपना एहद ख़िलाफ़ न करेगा (11)या ख़ुदा पर वह बात कहते हो जिसका तुम्हें इल्म नहीं हाँ क्यों नहीं जो गुनाह कमाए और उसकी ख़ता उसे घेर ले(12)वह दोजख़ वालों में है, उन्हें हमेशा उसमें रहना और जो ईमान लाए और अच्छे काम किये वो जन्नत वाले हैं, उन्हें हमेशा उसमें रहना (82)
तफ़सीर : सूरए बक़रह – नवाँ रूकू
(1) बनी इस्त्राईल ने गाय ज़िब्ह करके उसके किसी अंग से मुर्दे को मारा. वह अल्लाह के हुक्म से ज़िन्दा हुआ. उसके हल्क़ से ख़ून के फ़व्वारे जारी थे. उसने अपने चचाज़ाद भाई को बताया कि इसने मुझे क़त्ल किया है. अब उसको भी क़ुबूल करना पड़ा और हज़रत मूसा ने उस पर क़िसास का हुक्म फ़रमाया और उसके बाद शरीअत का हुक्म हुआ कि क़ातिल मृतक की मीरास से मेहरूम रहेगा. लेकिन अगर इन्साफ़ वाले ने बाग़ी को क़त्ल किया या किसी हमला करने वाले से जान बचाने के लिये बचाव किया, उसमें वह क़त्ल हो गया तो मृतक की मीरास से मेहरूम न रहेगा.(2) और तुम समझो कि बेशक अल्लाह तआला मुर्दे ज़िन्दा करने की ताक़त रखता है और इन्साफ़ के दिन मुर्दो को ज़िन्दा करना और हिसाब लेना हक़ीक़त है.(3) क़ुदरत की ऐसी बड़ी निशानियों से तुमने इबरत हासिल न की.
(4) इसके बावुजूद तुम्हारे दिल असर क़ुबूल नहीं करते. पत्थरों में अल्लाह ने समझ और शऊर दिया है, उन्हें अल्लाह का ख़ौफ़ होता है, वो तस्बीह करते हैं इम मिन शैइन इल्ला युसब्बिहो बिहम्दिही यानी कोई चीज़ ऐसी नहीं जो अल्लाह की तारीफ़ में उसकी पाकी न बोलती हो. (सूरए बनी इस्त्राईल, आयत 44). मुस्लिम शरीफ़ में हज़रत जाबिर (अल्लाह उनसे राज़ी) से रिवायत है कि सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया मैं उस पत्थर को पहचानता हूँ जो मेरी नबुव्वत के इज़्हार से पहले मुझे सलाम किया करता था, तिरमिज़ी में हज़रत अली (अल्लाह उनसे राज़ी) से रिवायत है कि मैं सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के साथ मक्का के आस पास के इलाक़े में गया. जो पेड़ या पहाड़ सामने आता था अस्सलामो अलैका या रसूलल्लाह अर्ज़ करता था.(5) जैसे उन्होंने तौरात में कतर ब्योंत की और सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की तारीफ़ के अल्फ़ाज़ बदल डाले.(6) यह आयत उन यहूदियों के बारे में नाज़िल हुई जो सैयदे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के ज़माने में थे. इब्ने अब्बास रदियल्लाहो अन्हुमा ने फ़रमाया, यहूदी मुनाफ़िक़ जब सहाबए किराम से मिलते तो कहते कि जिसपर तुम ईमान लाए, उस पर हम भी ईमान लाए. तुम सच्चाई पर हो और तुम्हारे सरदार मुहम्मदे मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम सच्चे हैं, उनका क़ौल सच्चा है. उनकी तारीफ़ और गुणगान अपनी किताब तौरात में पाते हैं. इन लोगों पर यहूद के सरदार मलामत करते थे. “व इज़ा ख़ला बअदुहुम” (और जब आपस में अकेले हों) में इसका बयान है. (ख़ाज़िन). इससे मालूम हुआ कि सच्चाई छुपाना और उनके कमालात का इन्कार करना यहूदियोँ का तरीक़ा है. आजकल के बहुत से गुमराहों की यही आदत है.
(7) किताब से तौरात मुराद है.(8) अमानी का अर्थ है ज़बानी पढ़ लेना. यह उमनिया का बहुवचन है. हज़रत इब्ने अब्बास से रिवायत है कि आयत के मानी ये हैं कि किताब को नहीं जानते मगर सिर्फ़ ज़बानी पढ़ लेना, बिना समझे (ख़ाज़िन). कुछ मुफ़स्सिरों ने ये मानी भी बयान किये हैं कि “अमानी” से वो झूटी गढ़ी हुई बातें मुराद हैं जो यहूदियोँ ने अपने विद्वानों से सुनकर बिना जांच पड़ताल किये मान ली थीं.(9) जब सैयदे अंबिया सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम मदीनए तैय्यिबह तशरीफ़ लाए तो यहूदियों के विद्वानों और सरदारों को यह डर हुआ कि उनकी रोज़ी जाती रहेगी और सरदारी मिट जाएगी क्योंकि तौरात में हुज़ूर का हुलिया (नखशिख) और विशेषताएं लिखी है. जब लोग हुज़ूर को इसके अनुसार पाएंगे, फ़ौरन ईमान ले आएंगे और अपने विद्वानों और सरदारों को छोड़ देंगे. इस डर से उन्होंने तौरात के शब्दों को बदल डाला और हुज़ूर का हुलिया कुछ का कुछ कर दिया. मिसाल के तौर पर तौरात में आपकी ये विशेषताएं लिखी थीं कि आप बहुत ख़ूबसूरत हैं, सुंदर बाल वाले, सुंदर आँख़े सुर्मा लगी जैसी, क़द औसत (मध्यम) दर्जे का है. इसको मिटाकर उन्होंने यह बनाया कि हुज़ूर का क़द लम्बा, आंख़े कंजी, बाल उलझे हुए हैं. यही आम लोगों को सुनाते, यही अल्लाह की किताब का लिखा बताते और समझते कि लोग हुज़ूर को इस हुलिये से अलग पाएंगे तो आप पर ईमान न लाएंगे, हमारे ही असर में रहेंगे और हमारी कमाई में कोई फ़र्क़ नहीं आएगा.(10) हज़रत इब्ने अब्बास से रिवायत है कि यहूदी कहते कि दोज़ख़ में वो हरगिज न दाख़िल होंगे मगर सिर्फ़ उतनी मुद्दत के लिये जितने अर्से उनके पूर्वजों ने बछड़ा पूजा था और वो चालीस दिन हैं, उसके बाद वो अज़ाब से छूट जाएंगे, इस पर यह आयत उतरी.(11) क्योंकि झूट बड़ी बुराई है और बुराई अल्लाह की ज़ात से असम्भव. इसलिये उसका झूट तो मुमकिन नहीं लेकिन जब अल्लाह तआला ने तुमसे सिर्फ़ चालीस रोज़ अज़ाब के बाद छोड़ देने का वादा ही नहीं फ़रमाया तो तुम्हारा कहना झूट हुआ.(12) इस आयत में गुनाह से शिर्क और कुफ़्र मुराद है. और “घेर लेने” से यह मुराद है कि निजात के सारे रास्ते बन्द हो जाएं और कुफ़्र तथा शिर्क पर ही उसको मौत आए क्योंकि ईमान वाला चाहे कैसा ही गुनाहगार हो, गुनाहों से घिरा नहीं होता, इसलिये कि ईमान जो सबसे बड़ी फ़रमाँबरदारी है, वह उसके साथ है.

mm

Noor Saba

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
mm

Comments

comments

Most Popular

To Top