Zakat

​हिकायते ज़क़ात​

* हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैही वसल्लम फरमाते हैं कि मुसलमान को जो भी माल का नुक्सान होता है वो ज़कात ना देने के सबब से होता है
📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 5,सफह 7
* शैतान हर तरह से इंसान को फरेब देने में लगा रहता है मगर जब कोई बंदा उसके फरेब में नहीं आता तो उसके माल से लिपट जाता है और उसको सदक़ा व खैरात करने से रोक देता है
📕 तिलबीसे इब्लीस,सफह 455
* ताबईन रज़ियल्लाहु तआला अन्हुम की एक जमात किसी फौत शुदा के घर उसकी ताज़ियत को गई वहां मरने वाले का भाई आहो बका व चीख पुकार कर रहा था,इस पर तमाम हज़रात ने उसे सब्र करने की तालीम दी इस पर वो बोला कि मैं कैसे सब्र करूं जबकि मैं खुद अपने भाई पर अज़ाब होते देखकर आ रहा हूं,वाक़िया कुछ युं है कि जब सब उसे दफ्न करके चले गए तो मैं वहीं बैठा रहा अचानक अपने भाई के चिल्लाने की आवाज सुनी वो चिल्ला रहा था कि सब मुझे छोड़कर चले गए मैं यहां अज़ाब में हूं मेरे रोज़े मेरी नमाज़ें सब कहां गई,इस पर मुझसे बर्दाश्त ना हुआ मैंने कब्र खोदा तो देखता क्या हूं कि उसकी क़ब्र में आग भड़क रही है और उसके गले में आग का तौक़ पड़ा है मैंने सोचा कि वो तौक़ निकाल दूं तो देखो कि खुद मेरा हाथ जलकर सियाह हो गया अब बताइये मैं कैसे सब्र करूं,जब उससे पूछा गया कि तुम्हारे भाई पर ये अज़ाब क्यों आया तो वो कहने लगा कि वो नमाज़ रोज़े और दीगर इबादतें तो खूब करता था मगर ज़कात नहीं देता था,जब ये खबर सहाबिये रसूल हज़रत अबु ज़र रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को मिली तो आपने फरमाया कि ये अल्लाह तआला ने तुमको इबरत हासिल करने के लिए दिखाया है वरना काफिरो मुशरिक पर तो अज़ाब दायमी है
📕 मुकाशिफातुल क़ुलूब,सफह 164
* हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जो लोग अपने माल की ज़कात नहीं अदा करेंगे तो क़यामत के दिन उनका माल गंजे सांप की शक्ल में उनके गले में पड़ा होगा और वो अपने जबड़ों से उसके मुंह को पकड़े होगा और कहेगा कि मैं तेरा माल हूं
📕 बुखारी,जिल्द 1,सफह 188
* कारून को अल्लाह ने इतनी दौलत अता फरमाई थी कि उसके एक खज़ाने की एक चाभी होती वो भी सिर्फ एक उंगली के बराबर इस तरह सिर्फ उसके खज़ानों की चाभियां ही 70 खच्चरों पर लाद कर चला करती थीं सोचिये कि उसके पास खज़ाना कितना रहा होगा,मगर जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उसे ज़कात का हुक्म दिया तो वो फिर गया और नाफरमानी की तो इतनी दौलत भी उसे रब के कहर से ना बचा सकी और वो अपने पूरे माल समेत ज़मीन में धंस गया और क़यामत तक धंसता ही रहेगा
📕 जलालैन,हाशिया 19,सफह 333
​लिहाज़ा मुसलमानों अपने माल की ज़कात पूरी पूरी ईमानदारी से अदा करें वरना अज़ाब के लिए तैयार रहें​

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Noor Aqsa

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