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Anmol Moti

सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के घरेलु गधे, खच्चर, फाड़खानेवाले जानवर और पंजेसे शिकार करनेवाली चिड़िया के गोस्त को हराम करार दिया है.
*(हवाला:- तिर्मिज़ी शरीफ)*
 सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के हमारे लिए दो मुरदार जानवर और दो खून हलाल किये गए है. मुरदार जानवर तो मछली और टिटडी है और दो खून कलेजी और तिल्ली है. (हवाला:- इब्ने माजह/मिश्कात शरीफ)
 सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम ने सापको मार डालनेका हुकम फरमाया और फरमाया के जो शख्स इस डर से सापको न मारे के दुसरा साप उससे बदला लेगा तो वोह हमारे तरीकेपर नहीं है. (हवाला:- मिश्कात शरीफ)*
 सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो शख्स गिरगिट या छिपकली को पहेली ज़र्ब (चोट) में मार डाले उसके लिए सो नेकिया, दूसरीमे उससे काम और तीसरीमे उससे भी कम (हवाला:- मुस्लिम शरीफ)*
 मछली के अलावा पानी के सब जानवर हराम है जैसे कछुवा, मगरमच्छ वगरैह।
 खरगोश जो बिल्ली की तरह एक तेज़ रफ़्तार जानवर होता है हलाल है. *(हवाला:- हदिया, सफहा -425)*
 सरकारे दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के जो शख्स जानवरोकी हिफाज़त या शिकार करने या खेतीकी देख-भाल के मकसद के अलावह सिर्फ अपने शोख की खातिर कुत्ता पाले तो रोज़ाना एक किरत के बराबर उसका सवाब कम होगा. *(हवाला:- बुखारी/मुस्लिम शरीफ)*
 जब जानवर हलाल करना चाहो तो ठीकसे हलाल करो, अपनी छुरी तेज़ करलो और जानवरको तकलीफ न पहुचाओ.
*(हवाला:- मुस्लिम शरीफ)*
 जानवर हलाल करनेमे चार रगे काटी जाती है, हलक़ूम जिसमे साँस आती है, मरी जिससे खाना-पानी उतरता है, इस के अलावह अगल-बगल दो रगे है जिनमे खून की रवानी होती है, इन रगो को वाद-जैन कहते है. (हवाला:- बहारे शरीयत)*
 किसी हिन्दु ने कहा के यह गोस्त मुसलमान का हलाल किया हुवा है तो उस गोस्त का खाना जाएज़ नहीं है, और अगर यह कहा के में यह गोस्त मुसलमानसे खरीदकर लाया हूँ तो उसका खाना जाएज़ है. *(हवाला:- दुर्रे मुख्तार)*
 जानबुज कर जानवर हलाल करते वक्त बिस्मिल्लाह अल्ल्लाहु अकबर न कहा तो जानवर हराम है, और भूल कर ऐसा हुआ तो हलाल है.
*(हवाला:- हदिया, जिल्द-4, सफ़्हा-419/बहारे शरीयत)*
 बकरी और भेंस वगैरह में बाइस (22) चीज़े ना-जाएज़ है. अोज़डी, आते, पेशाबकी थेली, फोते, ज़कर यानि नरकी पहचान, फर्ज याने मादा की पहचान, पाख़ानेका मकाम, रागोका खून,जिगर का खून, तिल्ली का खून, पित्ता, पित्त यानि वोह पिला पानी जो पित्तमे होता है. गदूद, हराम मग्ज़, गर्दन के दो पटके जो शानो तक खिंचे रहते है, नाक की तरी, नुत्फा चाहे नर की मनी मादाम पाई जाए, या खुद उस जानवर की मनी हो, वोह खून जो बच्चादान में नुत्फेसे बनता है. वोह गोस्त का टुकड़ा जो बच्चादान में नुत्फ़ेसे बनता है, चाहे हाथ-पाउ वगरैह बने हो या न बने हो, बच्चा जो बच्चादान में पूरा जानवर बन गया, और मुर्दा निकाला या बगैर हलाल किये मर गया.
 बंधूक या गुलेल का किया हुवा शिकार अगर मर जाए तो हराम है. *(हवाला:- रददुल मुख्तार/बहारे शरीयत)*
 जो शिकार शौकिया याने सिर्फ दिल बहलाने के लिए हो, बन्दुक, गुलेलका हो चाहे मछली का, रोज़ाना हो या कभी-कभी, बिलकुल हराम है. *(हवाला:- दुर्रे मुख्तार)*

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Noor Saba

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