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अनमोल मोती

*हर नेक काम का आगाज़ “बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम”*
Posted on 6 may 2017
🌻1. हर जाएज़ काम शुरू करनेसे पहले “बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम” पढ़लेना हर मुसलमानकी सच्ची पहचान है. सरकार दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम का इरशाद है के बगैर “बिस्मिल्लाह” पढ़े हर काम अधूरा और बे-बरकती है.
🌻2. “बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम” पढ़ कर अच्छे काम का आगाज़ करना सरकार दोआलम सल्लल्लाहो अलयहे वसल्लम की सुन्नत है.
🌻3. रोज़मर्रा के काम शुरू करनेसे पहले हमें “बिस्मिल्लाह” पढ़नेकी आदत बनालेनी चाहिए, ताके हमारे लिए अजरो-सवाब और बरकत का जरिया बने.
🌻4. घरमे दाखिल होते वकत, सवारी करते वकत, सवारीसे उतारते वकत, ठोकर लग जाए तब, बैतूल खलामे जानेसे पहले और बैतूल खलासे बाहिर निकलनेके बाद खाना खानेकी शुरुआत करने से पहले, पानी या और कोई पीनेके चीज़ पीनेसे पहले, कपडे बदलते वकत, बूट-चम्पल पहनते वकत, किताब पढ़ते वकत, कोई लिखाईके वकत, रोज़ी-रोज़गार शुरू करते वकत, नया काम शुरू करते वकत, मतलब के हर कामके आगाज़से पहले “बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम” पढ़नेकी आदत बनालेना नेकी कमानेका ज़रिया है.
🌻5. इसी तरह औरतोंको चाहिए के खाना बनाते वकत, अनाज साफ़ करते वकत, सिलाई करते वकत, बच्चोके कपडे बदलते वकत यह आदत खुद बनाले और अपनी औलादको भी यह आदत डाले.
🌻6. नेक कामकी शुरुआतमे “बिस्मिल्लाह” पढ़नेकी आदत एक ऐसी नेकी है जो बंदके अामाल नाममे मुसलसल नेकिया बढ़ाती है, अल्लाह अज़वजल हमारे कामोमे बरकत आता फ़रमाता है, और मुश्किल काम भी आशान फामादेता है. रोज़ी-रोज़गारमे बरकत होती है, “बिस्मिल्लाह” पढ़नेमे कोई वकत जाया नहीं होता. हमारे ज़यादा-तर काम दुनयावी होनेके बावजूदभी “बिस्मिल्लाह” पढ़लेनेकी बरकतसे इबादत -बंदगीमे सुमार कर लिए जाते है.
🌻7. दीगर इन्सान अपने रोज़ मर्राहके काम पूरे करते है और एक मुस्लिमभी अपने काम पुरे करता है, मगर इन दोनोमे ज़मीन आसमान का फर्क है. एक शख्स ग़फ़लत मे अपने काम करता है जब के एक मोमिन ” “बिस्मिल्लाह” पढ़कर अपने काम का आगाज़ करके यह साबित कर देता है के अल्लाह अज़वजलकी तौफीक के बगैर कोई काम पूरा करना ना-मुमकिन है. “बिस्मिल्लाह” का पढ़ना बंदेका अल्लाह तआला पर ईमान और यकीन होनेकी निशानी है. हमारे काम दुनयावी होनेके बावजूद दीने इस्लामका एक हिस्सा गिना जाता है और अल्लाह अज़वजललके करीब इबादतमे सुमार है।

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