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अल्लाह सुब्हान व त’आला क़ुरआन में सूरः कहफ़ में फरमाते हैं…

अल्लाह सुब्हान व त’आला क़ुरआन में सूरः कहफ़ में फरमाते हैं…

Al-Kahf 18:7

إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى ٱلْأَرْضِ زِينَةً لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا

और जो कुछ रुए ज़मीन पर है हमने उसकी ज़ीनत (रौनक़) क़रार दी ताकि हम लोगों का इम्तिहान लें कि उनमें से कौन सबसे अच्छा चलन का है

واقعہ یہ ہے کہ یہ جو کچھ سر و سامان بھی زمین پر ہے اس کو ہم نے زمین کی زینت بنایا ہے تاکہ اِن لوگوں کو آزمائیں اِن میں کون بہتر عمل کرنے والا ہے

और सूरः मुल्क में फरमाते हैं,,

Al-Mulk 67:1

تَبَٰرَكَ ٱلَّذِى بِيَدِهِ ٱلْمُلْكُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ

जिस (ख़ुदा) के कब्ज़े में (सारे जहाँन की) बादशाहत है वह बड़ी बरकत वाला है और वह हर चीज़ पर कादिर है।

نہایت بزرگ و برتر ہے وہ جس کے ہاتھ میں کائنات کی سلطنت ہے، اور وہ ہر چیز پر قدرت رکھتا ہے

Al-Mulk 67:2

ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْمَوْتَ وَٱلْحَيَوٰةَ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًاۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْغَفُورُ

जिसने मौत और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुम्हें आज़माए कि तुममें से काम में सबसे अच्छा कौन है और वह ग़ालिब (और) बड़ा बख्शने वाला है

جس نے موت اور زندگی کو ایجاد کیا تاکہ تم لوگوں کو آزما کر دیکھے تم میں سے کون بہتر عمل کرنے والا ہے، اور وہ زبردست بھی ہے اور درگزر فرمانے والا بھی

तो इंसना को अल्लाह ने बनाया ही इसलिए है के उसको आज़माये, के वो कैसे अमल करता है, अल्लाह ने इंसान को इख्तियार दिया है बुरे और अच्छे अमल में से खुद चुने के उसको क्या करना है।
और इन दुनिया को रौनक और ज़ीनत बनाया ताके वो देखे कौन इस दुनिया की रौनक में डूबता है, और कौन आख़िरत की तैयारी में, और अल्लाह की फरमाबरदारी में अपनी जिंदगी बसर करता है।

अल्लाह ने इस दुनिया की मिसाल पेश की है,,सूरः कहफ़ में…..

Al-Kahf 18:45

وَٱضْرِبْ لَهُم مَّثَلَ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا كَمَآءٍ أَنزَلْنَٰهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَٱخْتَلَطَ بِهِۦ نَبَاتُ ٱلْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًا تَذْرُوهُ ٱلرِّيَٰحُۗ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ مُّقْتَدِرًا

और (ऐ रसूल) इनसे दुनिया की ज़िन्दगी की मसल भी बयान कर दो कि उसके हालत पानी की सी है जिसे हमने आसमान से बरसाया तो ज़मीन की उगाने की ताक़त उसमें मिल गई और (खूब फली फूली) फिर आख़िर रेज़ा रेज़ा (भूसा) हो गई कि उसको हवाएँ उड़ाए फिरती है और ख़ुदा हर चीज़ पर क़ादिर है

اور اے نبیؐ! اِنہیں حیات دنیا کی حقیقت اِس مثال سے سمجھاؤ کہ آج ہم نے آسمان سے پانی برسا دیا تو زمین کی پَود خُوب گھنی ہو گئی، اور کل وہی نباتات بھُس بن کر رہ گئی جسے ہوائیں اڑائے لیے پھرتی ہیں اللہ ہر چیز پر قدرت رکھتا ہے

तो दुनिया की मिसाल ऐसी है जब पानी बरसता है आसमान से तो जो ज़मीन में सुखी घास होती है वो हरि भारी हो जाती है, फिर वो सुख जाती है और भूसा हो जाती है जिसको हवाएं उड़ाए फिरती है…

आगे फरमाया…

Al-Kahf 18:46

ٱلْمَالُ وَٱلْبَنُونَ زِينَةُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَاۖ وَٱلْبَٰقِيَٰتُ ٱلصَّٰلِحَٰتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ أَمَلًا

(ऐ रसूल) माल और औलाद (इस ज़रा सी) दुनिया की ज़िन्दगी की ज़ीनत हैं और बाक़ी रहने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब में उससे कही ज्यादा अच्छी हैं और तमन्नाएँ व आरजू की राह से (भी) बेहतर हैं।

یہ مال اور یہ اولاد محض دُنیوی زندگی کی ایک ہنگامی آرائش ہے اصل میں تو باقی رہ جانے والی نیکیاں ہی تیرے رب کے نزدیک نتیجے کے لحاظ سے بہتر ہیں اور اُنہی سے اچھی اُمّیدیں وابستہ کی جا سکتی ہیں

माल और औलाद ये दोनों चीज़े इस दुनिया की ज़ीनत है, जिसके पीछे इंसान अपनी सारी तावानाईयाँ खर्च कर देता है, माल जमा करता है चाहे वो हलाल से हो या हराम से, इसको जमा करने के लिए वो हर एक गुनाह करने के लिए तैयार रहता है, और औलाद…और औलाद को अच्छे से अच्छा खाना, कपड़ा ,उसकी अच्छी तरबियत के लिए इन्सान अपनी पूरी जिंदगी खपा देता है…

लेकिन अल्लाह ने नज़दीक तुम्हारी नेकियाँ सबसे अज़ीज़ हैं, तुम्हारे नेक अमाल जो तुम्हारे काम आएंगे क़यामत के दिन…

क़यामत के बारे में अल्लाह फरमाते है,,,

‘Abasa 80:33

فَإِذَا جَآءَتِ ٱلصَّآخَّةُ

तो जब कानों के परदे फाड़ने वाली (क़यामत) आ मौजूद होगी

آخرکار جب وہ کان بہرے کر دینے والی آواز بلند ہوگی

‘Abasa 80:34

يَوْمَ يَفِرُّ ٱلْمَرْءُ مِنْ أَخِيهِ

उस दिन आदमी अपने भाई,

اُس روز آدمی اپنے بھائی

‘Abasa 80:35

وَأُمِّهِۦ وَأَبِيهِ

और अपनी माँ और अपने बाप

اور اپنی ماں اور اپنے باپ

‘Abasa 80:36

وَصَٰحِبَتِهِۦ وَبَنِيهِ

और अपने बीवी और अपने औलाद से भागेगा

اور اپنی بیوی اور اپنی اولاد سے بھاگے گا

‘Abasa 80:37

لِكُلِّ ٱمْرِئٍ مِّنْهُمْ يَوْمَئِذٍ شَأْنٌ يُغْنِيهِ

उस दिन हर शख़्श (अपनी नजात की) ऐसी फ़िक्र में होगा जो उसके (मशग़ूल होने के) लिए काफ़ी हों

ان میں سے ہر شخص پر اس دن ایسا وقت آ پڑے گا کہ اسے اپنے سوا کسی کا ہوش نہ ہوگا

क़यामत के दिन इंसान के बीवी ,बच्चे, मां-बाप उस आए दूर भागेंगे, ये सोच कर के कहीं ये उनके नेक अमाल ना मांग ले….
जिनके लिए उसके अपने आमाल की फिक्र नाही की, उनके आराम की जिंदगी के लिए उसने हराम काम, गुनाह कर के उनके पेट भर थे दुनिया मे, वही उनके अपने क़यामत के दिन उसके काम नही आएंगे।

अल्लाह हमे नेक अमाल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
और आख़िरत की फिक्र अता फरमाए।
आमीन।

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