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अक़ीक़ा | Aqiqah

The Dua for aqeeqa is (if the baby is a boy): ‘Allahumma Hazihi Aqqeeqatu ____________ (call the child’s name). Damuha bi Damihi, Wa Lahmuha bi Lahmihi, Wa Adhmuha bi Adhmihi, Wa Jilduha bi Jildihi wa Sha’ruha bi Sha’rihi’

If the baby is a girl, say: ‘Allahumma Hazihi Aqeeqatu ____________ (call the child’s name). Damuha bi Damiha, Wa Lahmuha bi Lahmiha, Wa Adhmuha bi Adhmiha, Wa Jilduha bi Jildiha wa Sha’ruha bi Sha’riha.’

After saying any of the above, say, ‘Inni Wajahtu Wajhiya Lillazi Fataras Samawaati Wal Ardh. Haneefanw wa Maa Ana Minal Mushrikeen. Inna Salaati wa Nusuki Wa Mahyaya Wa Mamaati Lillahi Rabbil A’lameen, Laa Shareeka Lahu Wa Bi Dhalika Umirtu Wa Ana Awwalul Muslimeen. Allahumma Minka Wa Laka.’

Then say, ‘Bismillah Allahu Akbar’ and slaughter the animal. (Abu Dawood, Ibn Majah, Darimi, Ahmad).

And Allah Knows Best.

💬 बच्चा पैदा होने के बाद अल्लाह के शुक्र में जो जानवर ज़बह किया जाता है उसे अक़ीक़ा कहते हैं। अक़ीक़ा करना सुन्नत है। सुन्नत तरीका यह है कि बच्चे की पैदाईश के सातवें (7) रोज़ अक़ीक़ा हो और अगर न हो सके तो पन्द्रवे (15) दिन या इक्कीसवें (21) रोज़ या जब भी हैसीयत हो करे, सुन्नत अदा हो जाएगी।

💬 लड़के के लिए दो बकरे और लड़की के लिए एक बकरी ज़बह करे। लड़के के लिए बकरा और लड़की के लिए बकरी ज़बह करना बेहतर है। अगर लड़का लड़की दोनों के लिए बकरा या बकरी
भी ज़बह करे तो हर्ज नहीं।

💬 लड़के के लिए दो बकरे न हो सके तो एक बकरे में भी अक़ीक़ा कर सकते है।इसी तरह अगर गाये, भैस ज़बह करे तो लड़के के लिए दो हिस्से और लड़की के लिए एक हिस्सा हो। अक़ीक़े के जानवर के लिए भी वही शर्ते हैं जो क़ुरबानी के जानवर के लिए ज़रूरी है ।
📒 *(कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफा नं. 160)*

💬 अक़ीक़े के जानवर के तीन हिस्से किये जायें। एक हिस्सा गरीबों को खैरात कर दे दूसरा हिस्सा दोस्त व रिश्तेदारों में तक़सीम करे और तीसरा हिस्सा खुद रखें।
📒 *(इस्लामी ज़िन्दगी सफा नं 17)*

💬 अक़ीक़े का गोश्ते गरीबों फकीरों, दोस्त व रिश्तेदारों को कच्चा तकसीम करे या पका कर दे या फिर दावत कर के खिलायें सब सूरतें जाइज़ है।
📒 *(कानूने शरीअत, जिल्द 1, सफ़ा . 160)*

💬 अक़ीक़े का गोश्त माँ, बाप, दादा, दादी, नाना, नानी, वगैरा सब खा सकते है। अक़ीक़े के जानवर की खाल अपने काम में लाए, गरीबों को दे या मदरसा या मस्जिद में दें। यानी इस खाल का भी वही हुक्म है जो क़ुरबानी की खाल का हुक्म है।
📒 *(कानूने शरीअत, जिल्द , सफा नं. 160)*

💬 बेहतर है कि अक़ीक़े के जानवर की हड्डीयाँ तोड़ी न जाए। बल्कि जोड़ों से अलग कर दी जाए और गोश्त वगैरा खा कर जमीन में दफ्न कर दी जाए ।
📒 *(कीम्या-ए-सआदत, सफा नं. 267, इस्लामी जिन्दगी, सफा नं. 17)*

💬 हड्डी न तोड़ना बेहतर है और तोड़ना भी ना जाइज़ नहीं।
📒 *(कानूने शरीअत, जिल्द 1 सफहा 160 )*

💬 अक़ीक़े में बच्चे के सर के बाल मुंडवाए और उस के बालों के वजन के बराबर चांदी या (हैसीयत हो तो) सोना सदका करे।
📒 *(कीम्या-ए-सआदत, सफा नं. 267)*

*हदीस* :- इमाम मुहम्मद बाक़र رضی اللہ تعالی عنہ से रिवायत है::- रसूलुल्लाह ﷺ की साहबजादी हज़रते फातमा ने इमाम हसन, इमाम हुसैन, हज़रत जैनब और हज़रते उम्मे कुलसुम رضی اللہ تعالی عنہما के बाल उतरवा कर उन के वज़न के बराबर चाँदी खैरात फरमाई।
📒 *(मुअत्ता इमाम मालिक, जिल्द 1 , बाब किताबुल अक़ीक़ा, हदीस नं. 2, सफा न. 402)*

💬 अक़ीक़ा फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है सिर्फ सुन्नते मुस्तहेबा है। गरीब आदमी को हरगिज़ जाइज नहीं कि सूद पर क़र्ज़ ले कर अक़ीक़ा करे। क़र्ज़ ले कर तो ज़कात भी देना जाइज़ नहीं अक़ीक़ा जकात से बढ़कर नहीं।
📒 *(इस्लामी जिन्दगी, सफा नं. 18)*

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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