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बाप की अज़मत- वाक़या एक बाप बेटे का

एक शख़्स नबी करीम ﷺ की ख़िदमत मे हाज़िर हुआ और उसने अपने बाप की शिकायत की के या रसूलल्लाह ﷺ मेरा बाप मुझ से पूछता नहीं और मेरा सारा माल ख़्रच कर देता है…..!आप ﷺ ने उनके वालिदे मौहतरम को बुलवाया, जब उनके वालिद को पता चला के मेरे बेटे ने रसूलअल्लाह ﷺ से मेरी शिकायत की है तो दिल मे बहुत रंजीदा हुऐ और रसूलअल्लाह ﷺ की ख़िदमत मे हाज़री के लिये चल दिये…चूंकि अरब की घुट्टी मे शायेरी थी तो रासते मे कुछ अशआर यााद करते हुए जा रहे थें …इधर बारगाहे रिसालत मे पहुंचने से पहले “हज़रत जिबराईल(अ.स) आप ﷺ की ख़िदमत मे हाज़िर हुऐ और फरमाया के अल्लाह सुबहानहु तआला ने फरमाया है के इनका मामला बाद मे सुनियेगा पहले वोह अशआर सुुुुनेें जो वोह याद करते हुऐ आ रहे हैं………जब वोह हाज़िर हुऐ तो आप ﷺ ने फरमाया के आपका मामला बाद मे सुना जायेगा पहले वोह अशआर सुनाईये जो आप याद करते हुऐ आये हैं वोह मुख़लिस सहाबी थे यह सुनकर रोने लगे के जो अशआर अभी मेरी ज़बान से अदा भी नहीं हुऐ मेरे कानों ने भी नहीं सुने आप के रब ने सुन भी लिये और आपको बता भी दिया……….!!!
सहाबी ने अशआर पढने शुरू किये
ऐ मेरे बेटे जिस दिन तू पैदा हुआ
हमारी महनत के दिन भी शुरू हो गये
तू रोता था हम सो नहीं सकते थे
तू नहीं खाता था हम खा नहीं सकते थे
तू बीमार हो जाता तो तुझे लिये तबीब के पास इलाजो मुआलजे के लिये मारे मारे फिरते थे…
के कहीं कुछ हो न जाये
कहीं मर न जाये
हालांके मौत अलग चीज़ है और बीमारी अलग चीज़
फिर तुझे गरमी से बचाने के लिये मैं दिन रात काम करता के मेरे बेटे को ठंडी छांव मिल जाये
तुझे ठंड से बचाने के लिये मैने पत्थर तोडे तग़ारियां उठाईं के मेरे बच्चे को गरमी मिल जाये
जो कमाया तेरे लिये
जो बचाया तेरे लिये
तेरी जवानी के ख़्वाब देखने के लिये मैंने दिन रात महनत की, अब मेरी हड्डियां कमज़ोर हो गईं हैं लेकिन तू कडियल जवान हो गया
फिर मुझ पर ख़िज़ां ने डेरे डाल लिये और तुझ पर बहार आ गई
मैं झुक गया
तू सीधा हो गया
अब मेरी ख्वाहिश और मेरी उम्मीद पूरी हुई के अब तू हरा भरा हो गया है
चल अब ज़िंदगी की आख़री सांसें तेरी छांव मे बैठ कर गुज़ारूंगा
मगर यह किया जवानी आते ही तेरे तैवर बदल गऐ
तेरी आंखें माथे पर चढ गईं
तू ऐसे बात करता है जैसे मेरा सीना फाड कर रख देता है
तू ऐसे बात करता है के कोई ग़ुलाम से भी बात नहीं करता
फिर मैने अपनी सारी ज़िंदगी की महनत को भुला दिया के मैं तेरा बाप नहीं नौकर हूं
नौकर को भी कोई ऐक वक़्त की रोटी दे ही देता है
तू नौकर समझ कर ही मुझे रोटी दे दिया कर
#आप ﷺ यह अशआर सुनकर इतना रोये के आप ﷺ
की डाढी मुबारक तर होगई, आप:ﷺ अपनी जगह से उठे और उस बेटे का गिरेबान पकड कर फरमाया….
तू और तेरा सब कुछ तेरे बाप का है
तू और तेरा सब कुछ तेरे बाप का है
तू और तेरा सब कुछ तेरे बाप का है…….
Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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