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बेवा और तलाक़ याफ्ता औरतें कहां जाएं

हमारे माशरे में अक्सर ख्वातीन जिनकी तलाक़ हो जाए या उनका शौहर मर जाए तब उनको लोग 1 अजीब औरत समझने लगते हैं तलाक़ याफ्ता और बेवा होना कोई ऐब तो नहीं बस तक़दीर का फैसला है
अब अक्सर देखा जाता है उनसे कोई शादी करना पसंद नहीं करता हालांके अक्सर ऐसी औरतों की उम्र 28 से 40 साल के बीच की होती है
अब उनसे शादी ना करना ना इंसाफी है क्या हुआ जो वो तलाक़ याफ्ता हैं क्या अब उस औरत को शादी करने का हक़ नहीं रहा
ऐसी बिचारी औरतें सारी जिंदगी घर मे बैठ कर गुज़ार देती हैं
हर आदमी चाहता है मैं कंवारी लड़की से शादी करूँ पड़ी लिखी हो खूबसूरत हो दौलत वाली हो और ग़रीब की बेटियां घर मे बैठी रहती हैं बूढ़ी हो जाती हैं कोई नही सोंचता सब क़ारून बने बैठे हैं अपनी दौलत पे
क्या होता जो कुछ पैसे ग़रीब बाप को दे देते जो कर्ज़ों के बोझ तले दबा हुआ है जो अपनी बेटी की शादी जवानी में कर पाता ????
मेरी दर्द मंदाना गुज़ारिश तमाम मुसलमान मर्दों से है ख़ुदारा कंवारी से भी शादी करें मगर साथ ही साथ तलाक याफ्ता और बेवा औरतों से भी निकाह किया करो ताके हम सब उनकी बाक़ी ज़िन्दगी का सहारा बन सकें
मैंने खुद देखा जिनकी 27 से 30 साल तक की उम्र में तलाक हो गई या बेवा हो गईं तो अभी उनकी बहुत ज़िन्दगी पड़ी है खुदा के लिए उन्हें अपने निकाह में लाएं
हमारे प्यारे पैगम्बर हज़रत मुहम्मद ﷺ की फक़त एक बीवी हज़रत अम्मा आयशा बिन्ते सिददीक़ रदियल्लाहो अन्हां ही कंवारी थीं बकिया सारी अज़वाज ए पाक बेवा थीं या तलाक़ शुदा थीं
ये उम्मत को दर्स देना भी मक़सूद था ….. मेरे इस दर्द को सब समझें और दिल मे उतारें ….
अगर आप पहले से शादी शुदा हैं और हुक़ूक़ पूरे कर रहे हैं और अगर आपको दूसरी शादी की ख्वाहिश है तो ख़ुदारा तलाक़ शुदा या बेवा औरत से निकाह करें
बुनियादी चीज़ अगर आप 2 शादियों के बाद अपनी वीवियों से महब्बत और बराबरी क़ायम रख सकते हैं और ज़ुल्म से बच सकते हैं तो ज़रूर करें माशरे में परेशान बेसहारा ख़्वातीन का सहारा बनें
इस पोस्ट से वो औरतें इख़्तिलाफ़ करेंगी जो अपने शौहर को दूसरी शादी की इजाज़त नहीं देतीं
उनसे कहना चाहूंगा अगर आपका शौहर बराबरी और महब्बत क़ायम रख सकता है तो ज़रूर इजाज़त दें
जिस तरहा आप किसी बाप की बेटी हैं उसी तरहा वो भी किसी बाप की बेटियां हैं जो तलाक़ याफ्ता हैं या बेवा हैं उनका दर्द महसूस करें बिला शुबा 1 औरत ही औरत का दर्द महसूस कर सकती है
और शौहरों से कहना चाहूंगा अगर वाक़ई ज़ुल्म ही करना है तो एक शादी भी न करें कियूँ किसी की बेटी की ज़िंदगी खराब करते हो
इस लिए आइये आज अहद करते हैं जितनी भी बेवा या तलाक़ वालियां हैं उनका सहारा बनने की कोशिश करेंगे और क़ौम के हम दर्दो को इस जानिब ध्यान दिलाएंगे इंशा अल्लाहः
हम सब बदल सकते हैं ऐसी ख्वातीन ऐसी ख्वातीन का हांथ थाम सकते हैं उन्हें इज़्ज़त दें अपने निकाह में लाएं
माशरे में बढ़ती हुई बेहयाई को क़ाबू करने में मुआविन बने
ना जाइज़ ताल्लुक़ात रखने में मर्द आगे होते हैं लेकिन उन औरतों से शादी करने में सब पीछे हट जाते हैं
खैर हांसिले कलाम ये मेरी अपनी राय थी सब एग्री नहीं हो सकते हैं फिर भी कोशिश की जाए तो भला हो सकता है बहुत सी ख़्वातीन का दुआ फरमाऐं अल्लाहः सबसे पहले मुझे हिदायत दे बाद और अहबाब को भी
Aafreen Seikh is an Software Engineering graduate from India,Kolkata i am professional blogger loves creating and writing blogs about islam.
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