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Month: July 2020

Maahe Muharram Roze Ki Fazilat

Yun To Tamam Mahine aur unme kiye jaane waale nek amaal Allah ki bargaah me kabool aur makbool hote hai par khas mahine aur din aise bhi hote hai jinke ahmiyat aam din wa mahine kay mukable bahot zyada hoti…

9 aur 10 Muharram ka Roza

Fasting of 9 and 10 Muharram or 10th & 11th (9 aur 10 Muharram ka Roza ) Abdullah Bin Abbas (Radhiallahuanhu) se rivayat hai ki Jab Roza rakha RASOOL ALLAH (Sal lal lahu Alaihi Wa sal lam) Ne Aashurey ke…

Muharram Kya hai

मुहर्रम कोई त्योहार नहीं है, यह सिर्फ इस्लामी हिजरी सन् का पहला महीना है। पूरी इस्लामी दुनिया में मुहर्रम की नौ और दस तारीख को मुसलमान रोजे रखते हैं और मस्जिदों-घरों में इबादत की जाती है। क्यूंकि ये तारिख इस्लामी इतिहास कि बहुत खास तारिख है…..रहा सवाल भारत में ताजियादारी का तो यह एक शुद्ध भारतीय परंपरा है, जिसका इस्लाम से कोई ताल्लुक़ नहीं है।. मुहर्रम की फजीलतों में से एक सबसे बड़ी फ़ज़ीलत है इस महीने का रोज़ा. इस महीने की 9 और 10 तारीख को या फिर 10 या 11 तारीख को रोज़ा रखते हैं . इसकी मशहूर हदीसें निचे दी गयी हैं:- 1.हज़रात अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रजि०) से रिवायत है कि जब रसूलल्लह सल्लल्लहु अलैही वसल्लम मदिने में तशरीफ़ लाए तो यहुद को देखा कि आशुरे के दिन का रोजा रख्ते है. लोगो से उन्होंने  पूछा  कि क्यो रोजा रखते है तो उन लोगों ने कहा कि ये वो दिन है जब अल्लाह तआला ने मूसा (अलैह०)और बनी इसराइल को फ़िरऔन पर ग़लबा (जीत) दिया, इसलिए आज हम रोजेदर हैं उनकी ताज़ीम के लिए.. तो नबी-ए-करीम (स० अलैह०) ने फ़रमाया हम तुम से ज़्यदा दोस्त हैं और करीब हैं मूसा (अलैह०) के. फिर आप (स० अलैह०) ने सबको हुक्म दिया इस रोज़े का . (सहीह मुस्लिम: जिल्द 3, किताब 6(रोज़े के मसाइल), हदीस नंबर 2656) 2.हज़रात अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रजि०) से रिवायत है के जब मुहम्मद (स० अलैह०) ने 10वीं मुहर्रम का रोज़ा रखा और लोगों को हुक्म दिया तो लोगों ने कहा की या रसूलल्लाह (स० अलैह०)  ये दिन तो ऐसा है कि इसकी ताज़ीम यहूद-ओ-नसारा करते हैं,तो आप (स० अलैह०) ने फ़रमाया के जब अगला साल आएगा तो हम 9 का रोज़ा रखेंगे.आखिर अगला साल न आने पाया की मुहम्मद (स० अलैह०) की वफ़ात हो गयी. (इसलिए हम मुस्लमान ९ और १० दोनों का रोज़ा रखते हैं ) (सहीह मुस्लिम: जिल्द 3, किताब 6(रोज़े के मसाइल), हदीस नंबर 2666 ) 3.अबु क़तादा-अल-अंसारी (रजि०) से रिवायत है के नबी-ए-करीम  सल्लल्लहु अलैही वसल्लम से आशूरा (10 मुहर्रम) के दिन के रोजे के बारे में  पूछा तो आप सल्लल्लहु अलैही वसल्लम ने फ़रमाया की ये गुज़रे हुए साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा है. (सहीह मुस्लिम: जिल्द 3, किताब 6(रोज़े के मसाइल), हदीस नंबर 2747 ) इसलिए जब हम आशूरा का रोज़ा रखें तो यहूद-ओ-नशरा की मुशबेहत न करते हुए 10वीं मुहर्रम के साथ साथ 9वीं मुहर्रम का भी रोज़ा रखें. इस तरह हदीसों से मुहर्रम के महीने में अगर कुछ साबित है तो वो है मुहर्रम का रोज़ा. बाकी जो भी चीज़ें हम देखते या सुनते हैं सरासर बिददत और शिर्क हैं जो हमे गुमराही की तरफ ले जाते हैं. न तो हदीसों से कही मातम करने का ज़िक्र मिलता है न ताजियादारी का और न ही ढोल नगाड़े बजने और जुलूसे निकलने का ज़िक्र है. ये सरासर गुमराही है. कुल मिलकर ताज़िया का इस्लाम से कोई ताल्लुक़ ही नही है….लेकिन हमारे भाई बेहनो को इल्म नहीं है और इस वजह से इस काम को सवाब समझ कर करते है उन्हें हक़ीक़त बताना भी हम सब का काम है…… कुरान फरमाता है: “और उन लोगों से दूर रहो जिन्होंने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया.” (पारा: ७) हदीस में है: जो (मैय्यत के ग़म में) गाल पीटे, गरीबन फाड़े, और चीख व पुकार मचाये वो हम में से नहीं” (बुखारी) रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया मेरी उम्मत में ऐसे लोग भी होंगे जो ढोल बाजो को हलाल (जाइज़) कर देंगे (बुखारी) ताजिया बनाना, बाजे ताशे के साथ उठाना, इस की ज्यारत करना, अदब करना, ताज़ीम करना, सलाम करना, चूमना, बच्चो को दिखाना, हरे कपडे पहनना, फकीर बनाना, भिक मंगवाना, ये सब नाजायेज़ व गुनाह है…

दुनिया की हक़ीकत

#ﺑِﺴْــــــﻢِﷲِﺍﻟـــﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلْـــرﺣــــــِﻴﻢ दुनिया की हक़ीकत हदीस:- मौला ने जन्नत को मुशकिलात से और जहन्नम को आराईश से घेर दिया है। (मिश्कात शरीफ़,जिल्द 1,सफ़हा 505) हदीस:- एक मर्तबा हुज़ूरﷺ का गुज़र एक मुर्दा बकरी पर हुआ आपने फ़रमाया कि क्या ये बकरी…

Chahal Hadees – चैहल हदीस

1. सुब्हा के वक़्त का सोना रिज़्क को रोकता है। 2. बात करने से पहले सलाम किया करो। 3. पाकी आधा ईमान है। 4. वजु नमाज़ की कुंजी है। 5. नमाज़ दिन का सुतून है।               6. दुवा इबादत का…

Kabristan me jaane ke Adab

सवाल :- क्या क़ब्रिस्तान के अंदर जूते – चप्पल पहनकर जा सकते हैं? जवाब :- शरीअत का हुक्म येह है कि क़ब्रिस्तान में अगर दफ़्न करने जाये तो जूते – चप्पल उतार ले और क़ब्र वालों केलिये बख़्शिश की दुआ करता…

जहन्नम क्या है.?

** जहन्नम क्या है.? ** •• ** क़िस्सा एक बुज़ुर्ग का ** •• एक मशहुर बुज़ुर्ग थें अपने सादगी के आलम में पुराने कपडे डाल कर एक तंदुर की दुकान पर गए और कहा मुझे एक रोटी दे दो। दुकानदार…

Eid Ul Adha Ki Ibadat

Hazrat Ibrahim khaliullah aur Hazrat ismail jabihullah ki kurbanion ne is Mubarak mahine ko qayanat tak ke liye tarikhi yaadgaar bana diya. Iske alawa ibadat wa riyazat ke ayetbaar se bhi yah bada Mubarak mahina hai. Allah paak ne apne…

इस्लाम में कुफ्फार मुर्दे और मोमिन मुर्दो का फर्क

1]इस्लाम में कुफ्फार मुर्दे और मोमिन मुर्दो का फर्क (अन्तर) : शेख नज्दी (मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब), जो हम्फ्रे और लॉरेंस नामक यहूदी और ईसाई जासूस के संपर्क में था , वह न केवल सहाबा कराम (रिज्वान-अल्लाह तआला अलैहिम अज्मइन)…

बेवा और तलाक़ याफ्ता औरतें कहां जाएं

हमारे माशरे में अक्सर ख्वातीन जिनकी तलाक़ हो जाए या उनका शौहर मर जाए तब उनको लोग 1 अजीब औरत समझने लगते हैं तलाक़ याफ्ता और बेवा होना कोई ऐब तो नहीं बस तक़दीर का फैसला है अब अक्सर देखा…