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अकसर लोग कहते हैं कि औरत मर्द के वजूद से ही दुनिया में आई…
औरत पसली से निकली इसलिए उसमे टेढ़ापन है…
बात शायद बजा हो साहेबान इल्म की नज़र में……

पर मुझ कम अक़ल की नज़र में इस बात को किसी और ऐंगल से देखना है….
मैं ने इसका जवाब ढूंढने की बहोत कोशिश की…
याद रहे जवाब आपको उसी वक़्त मिलने शुरू हो जाते हैं जब ग़ौर-व-फ़िकर और जुस्तजू बढ़ जाए, तब अल्लाह पाक कायनात की एक एक चीज़ को कहता है कि देखो मेरा बन्दा मेरी बनाई हुई तख़लीक़ और चीज़ों को जानने की कोशिश कर रहा है…..
ताकि वह अपने रब को पहचान सके….

जी तो बात औरत की तख़लीक़ की चल रही थी क्या कभी किसी ने यह सोचा कि वह अल्लाह जो हर चीज़ पर क़ादिर है वह जहां फ़रिश्तों को हुक्म दे के ज़मीन के हर हर जगह से मिट्टी मंगवा के मर्द की तख़लीक़ कर सकता है क्या वह रब उसी मिट्टी से औरत की तख़लीक़ नही कर सकता था क्या……?
मर्द की पसली से औरत को बना के अल्लाह ने मर्द को अपनी उस हिकमत का इशारा दिया कि मैं ने औरत की तख़लीक़ फ़रिश्तों की लाई हुई मिट्टी से नही की….
मैं ने उसे तुम्हारे जिस्म के हिस्से से उस लिए निकाला कि औरत का ताक़द्दुस और पर्दा क़ायम रहे…
फ़रिश्तों को भी ख़बर ना होने पाए कि ज़मीन की लाई हुई किस मिट्टी से औरत की तख़लीक़ हुई…
यानी औरत के ताक़द्दुस की हद तो देखें कि फ़रिश्तों से भी उसकी बनावट का पर्दा लाज़मी क़रार दिया गया….
और पहली औरत उसी मर्द की पसली से निकली जिसकी वह मनकोहा कहलाई…

अब बात आती है पसली की औरत पसली से ही क्यों निकली क्या टेढापन वहां से मिला…?
नही यहां भी हिकमत से ख़ाली बात नही इंसानी जिस्म में दिल और बहोत से नाज़ुक पार्ट पसली के पीछे छिपे हुए हैं..
यानी पसली एक ढाल है उन नाज़ुक पार्ट्स के लिए…
तो अल्लाह पाक ने औरत को पसली से निकाल के यह नही बताया कि औरत में टेढापन है बल्कि उस ने औरत की पसली से तख़लीक़ करके यह बात समझा दी…
की औरत वक़्त पड़ने पे ढाल भी बन सकती है…

#नोट :- जितना हो सके सब हर बात को मुसबत पहलू से तलाश किया करें मंफ़ी पहलू निकाल के अल्लाह की बनाई तख़लीक़ और चीज़ों का मज़ाक़ ना बनाएं….!

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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