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Bimar ki namaz ka bayaan in hindi

बीमार की नमाज का बयान | Bimar ki namaz ka bayaan in hindi

बीमार की नमाज का बयान अगर बीमारी की वजह से खड़े होकर नमाज़ नहीं पढ़ सकता कि मरज बढ़ जाएगा । या देर में अच्छा होगा । या चक्कर आता है । या खड़े होकर पढ़ने से पेशाब का कतरा आएगा । या नाकाबिले बरदाश्त दर्द हो जाएगा तो इन सब सूरतों में बैठ कर नमाज पढ़े ।

( दुर्रे मुख्तार जि , 1 स . 508 )

मसला : – अगर लाठी या दीवार से टेक लगा कर खड़ा हो सकता है तो उस पर फ़र्ज़ है कि खड़े होकर नमाज पढ़े । इस सूरत में अगर बैठ कर नमाज़ पढ़ेगा तो नमाज़ नहीं होगी ।  ( दुर्रे मुख्तार जि , 1 स . 509 )

मसला : – अगर कुछ देर के लिए भी खड़ा हो सकता है अगरचे इतना ही खड़ा हो कि खड़ा होकर अल्लाहु अक्बर कह ले तो फ़र्ज़ है कि खड़ा होकर इतना कह ले फिर बैठे वरना नमाज़ न होगी ।

( दुर्रे मुख्तार जि . 1 स . 509 )

मसला : – अगर रुकूअ व सज्दा न कर कसता हो तो बैठ कर नमाज़ पढ़े और रुकूअ व सज्दा इशारे से करे । मगर रुकूअ के इशारे से सज्दा के इशारे में सर को ज्यादा झुकाये ।     ( दुर्रे मुख़्तार स . 509 )

मसला : – अगर बैठ कर भी नमाज़ न पढ़ सकता हो तो ऐसी सूरत में लेट कर नमाज़ पढ़े इस तरह कि चित लेट कर किबला की तरफ पाँव करे | मगर पाँव न फैलाये बल्कि घुटने खड़े रखे और सर के नीचे तकिया रख कर जरा को ऊँचा करे । और रुकूअ व सज्दा सर के इशारा से करे ।

( दुर्रे मुख्तार जि . 1 स . 510 )

मसलाः – अगर मरीज सर से इशारा भी न कर सके तो नमाज़ साकित हो जाती  है । फिर अगर नमाज के छ : वक़्त इसी हालत में गुजर गए तो कजा भी साकित हो जाती है ।  ( दुर्रे मुख़्तार जि . 1 स . 510 )

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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