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Etiquettes Of Dua | दुआ के आदाब

Etiquettes Of Dua | दुआ के आदाब

1. दुआ की कुबूलिया का यक़ीन हो
इस बात का यक़ीन हो कि इस दर से कोई न खाली गया है न जायेगा और यहीं से मेरी ज़रुरत पूरी होगी |
2. पूरी तवज्जो और यक्सू होकर दुआ करो
जिस वक़्त दुआ कर रहे हो आपकी पूरी तवज्जो सिर्फ अल्लाह ही की तरफ हो, ये न हो कि दुआ अल्लाह से मांग रहे हैं और ध्यान दूकान या मकान में लगा है |
3. दुआ करते समय क़िबला का सामना करें
आप किबला का रुख बैठ जाएँ जिस रुख पर नमाज़ पढ़ते हैं |
4. दुआ के लिए हाथ उठाना
दुआ के लिए हाथ उठाना सुन्नत है लेकिन अगर बगैर हाथ उठाये ही दुआ कर रहा है तो भी ठीक है, लेकिन जब बंदा हाथ उठा कर कुछ मांगता है तो ज़्यादा बेबसी और आजिज़ी ज़ाहिर होती है इसलिए हाथ उठाकर ही दुआ करें |
5. आसानी और तकलीफ दोनों में दुआ करें
आम तौर से होता है कि जब हम आसानी में होते हैं ख़ुशी का मौक़ा रहता है तो दुआ तो छोड़ो खुदा ही को भूले रहते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए हर हाल में अल्लाह से लौ लगा के रखना चाहिए |
6. अपने गुनाहों का एतराफ करे
दुआ में सीधे अपनी ज़रुरत न रखे बल्कि अपने गुनाहगार होने का एतराफ करे और अपनी गलतियों पर शर्मिंदा हो |
7. खास ख़ास दुआओं को तीन बार दोहराए
इब्ने माजा की रिवायत में है कि नबी स.अ. ने जब जन्नत की तलब और जहन्नम से पनाह मांगी तो 3 बार कहा “ए अल्लाह मुझे जन्नत से नवाज़ दे और जहन्नम से पनाह दे दे”
8. पहले अपने लिए दुआ मांगे
जब कभी किसी दुसरे के लिए दुआ के लिए हाथ फैलाना हो तो पहले अपने लिए दुआ मांगे फिर दुसरे के लिए मांगे तिरमिज़ी की रिवायत में है कि “पहले अपने लिए मांगे फिर दुसरे के लिए मांगे”
9. मामूली से मामूली चीज़ भी अल्लाह ही से मांगे
तिरमिज़ी शरीफ़ की एक हदीस में आया है कि “तुम में से हर एक को चाहिए कि अपनी ज़रुरत अल्लाह से मांगे यहांतक कि जूते का तस्मा ( डोरी ) भी टूट जाये तो वो भी अल्लाह से मांगे”
ये नहीं कि घर में नमक नहीं है तो इसे मैं खुद ही ला सकता हूँ, आने वाले वक़्त में कुछ भी हो सकता है इसलिए पहले अल्लाह से ज़रूर कहो कि मुझे इसकी ज़रुरत है |
10. अल्लाह को उसका नाम या उसकी सिफ़ात से पुकारना
दुआ में इस तरह कहे कि ए अल्लाह, ये नाम है उसकी सिफ़ात यानि जो अल्लाह के 99 नाम है वही उसकी सिफ़ात है जैसे या रहमान या रहीम वगैरह
11. अल्लाह के डर से रोना
अल्लाह के सामने जब बंदा आंसुओं को बहाता है तो अल्लाह को अपने बन्दे पर प्यार आता है और अपनी रहमत में ढांप लेता है |
12. आमीन कहना
जब कोई शख्स किसी दुसरे की दुआ सुन रहा होता है, तो उसे अमीन कहना चाहिए, जिसका मतलब है ए अल्लाह! क़ुबूल कर ले ।
13. पहले अल्लाह की तारीफ, नबी Sallallhu Alaihi Wasallam par दुरूद पढ़े
दुआ शुरू करने से पहले और अपनी ज़रुरत रखने पहले अल्लाह की तारीफ़ करे जैसे सूरह फातिहा, फिर नबी Sallallhu Alaihi Wasallam पर दुरूद शरीफ़ पढ़े उसके बाद अपनी ज़रुरत रखे |
Aafreen Seikh is an Software Engineering graduate from India,Kolkata i am professional blogger loves creating and writing blogs about islam.
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