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दुर्वेश कामिल का वाक़िअ

बाबा फरीद गंजे शकर رحمتہ اللہ علیہ फरमाते हैं कि:
“एक बुज़ुर्ग अल्लाह तआला के खौफ से चालीस साल रोता रहा- जब उसे मौत याद आती तो बेद के पत्ते की तरह कांपता और हज़ार मर्तबा बेहोश होकर गिरता- जब होश में आता तो ये आयत पढ़ता:
اِنَّ الْاَبْـرَارَ لَفِىْ نَعِـيْمٍ وَاِنَّ الْفُجَّارَ لَفِىْ جَحِـيْمٍ۔
“बेशक नेक लोग बहिश्त में और बदकार नाफरमान दोज़ख में जाएंगे-”
( سورۃ الانفطار،آیت:۱۳،۱٤ )

फिर नारा मार के बेहोश होकर गिर पड़ता और कहता:
“मुझे मालूम नहीं कि क़यामत के दिन इन दो में से मैं किस गिरोह में हूंगा-”
जब फौत हो गया तो उसे ख्वाब में देखकर पूछा गया कि:
“अल्लाह तआला ने आपसे क्या सुलूक़ किया?”
फ़रमाया:
“जैसा दोस्तों से करता है-”
जब मुझे अर्श के नीचे ले गए तो पूछा कि:
“अय दुर्वेश!तू इस क़द्र क्यूं रोया करता था..क्या मुझे ग़फ्फार नहीं जानता था..?”
मैंने अर्ज़ किया कि:
“मैं तेरी क़ह्हारी के सबब डरता था कि कहीं मेरी सारी इबादत अकारत (यानी बेकार) ना जाए इस डर की वजह से रोता था-”
जब ये अर्ज़ की तो हुक्म हुआ कि:
“जाओ…!तुझे हमने बख्श दिया…!!!”
نام کتاب = اسرارُالاولیاء ( ملفوظات حضرت بابا فریدالدّین مسعود گنج شکر رحمتہ اللّہ علیہ )
صفحہ = ۱٤۰
مرتب = حضرت مولانا بدرُالدّین اسحاق رحمتہ اللّہ علیہ
مترجم = حضرت مولانا غلام احمد بریاں ( خلیفہ حضرت خواجہ اللّہ بخش تونسوی رحمتہ اللّہ )

Aafreen Seikh is an Software Engineering graduate from India,Kolkata i am professional blogger loves creating and writing blogs about islam.
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