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Nabi ki Ummat .

एक मर्तबा तमाम फरिश्तो के सरदार हज़रते जिबराईल अलैहिस्सलाम नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम कि बारगाह मे हाज़िर हुवे और अर्ज़ कि या रसूलुल्लाह मेने नूह अलैहिस्सलाम कि उम्मत को जहन्नुम मे जाते देखा,
मेने हज़रते मूसा अलैहिस्सलाम कि उम्मत को जहन्नुम मे जाते देखा,
मेने ईसा अलैहिस्सलाम कि उम्मत को जहन्नुम मे जाते देखा ..
और इतना फरमाने के बाद जिबराईल अलैहिस्सलाम खामोश हो गये तो आप सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने अर्ज़ किया क्या तुमने मेरी उम्मत को जहन्नुम मे जाते देखा..?
आप खामोश रहे, ,,फिर पुछा ऐ जिबराईल ये बताओ क्या तुमने मेरी उम्मत को जहन्नुम मे जाते देखा? तो सुनकर हज़रते जिबराईल ने अर्ज़ किया हाँ या रसूलुल्लाह, ,,,,ईतना सुनना था कि आप सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम कि आँखो मे आँसु आ गये दिल तङप गया आप बे ईन्तिहाँ रोने लगे और रोते हुवे अपनी उम्मत के गम मे सेहराओ और जंगल मे निकल गये और एक गार (गुफा) मे पहुच कर सज्दे मे सर रख कर रोते हुवे बस ये फरमा रहे थे कि “मेरी उम्मत, मेरी उम्मत “ईधर सहाबा किराम रज़ियल्लाहु अन्हु अजमईन अपने आका को मदिने मे ना पाकर बेचेन हो गये कि हमारे आका हुजूर सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम कहाँ तशरीफ ले गये सब जगह ढुढ लिया लेकिन कमली वाले आका का कही पता ना चला सहाबा किराम ढुढते ढुढते जब जंगल कि तरफ निकले तो आपको एक बकरी चराने वाला चरवाहा मिला सहाबा किराम ने उससे पुछा कि क्या तुमने मोहम्मदे अरबी सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम को कही देखा है? वो चरवाह कहने लगा मुझे नही मालुम तुम किसकी बात कर रहे हो लेकिन उस गुफा मे एक शख्स रो रहा है उनकी दर्द भरी रोने कि अवाज़ सुनकर मेरी बकरियों ने घास को चरना तक छोङ दिया है सहाबा किराम ये सुनकर समझ गये कि ये हमारे आका हुजूर सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम हि है उस गुफा मे पहुच कर सहाबा किराम ने देखा कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम सज्दे मे रखकर अपनी उम्मत के गम मे रो रहे है और रोते हुवे बस अपनी उम्मत को याद कर रहे है ,,,,ज़मिन है कि आपके मुबारक आँसूओ से तर हो गई है लेकिन किसी कि हिम्मत नही हुवी कि हुजूर को सज्दे से उठाए फिर हुजूर कि प्यारी बेटी हज़रत फतिमातुज़्ज़ेहरा रज़ियल्लाहु अन्हा को बुलाया गया ,,,,हजरत फतिमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने आ कर अर्ज़ कि या रसूलुल्लाह अपना सरे मुबारक ऊठाईये फिर अल्लाह से दुआ कि या अल्लाह अपने मेहबुब कि उम्मत को अपने मेहबुब के हवाले कर दे ,,,इतने मे जिबराईल अलैहिस्सलाम अल्लाह का पैगाम ले कर तशरीफ ले आए और अर्ज किया या रसूलुल्लाह सज्दे से सरे मुबारक ऊठाईये अल्लाह आपकी उम्मत फेसला आपके हवाले करता है और आपको शफाअत का मकाम अता फरमाता है आपकी शफाअत कुबुल कि जायेगी…
(फतेहुल रब्बानी सफा २६७)
फलसफा -वो हमारे गम मे बेकरार रहते थे और एक हम है कि आपकी मोहब्बत मे आपके बताए हुवे तरीके पर भी ना चल पा रहे है जबकी उसी मे हमारी कामयाबी है क्या यही मोहब्बत का तकाज़ा है?

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