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1.फजर के वक्त कितनी रकात नमाज़ पढ़ी जाती है?

ans.फज़र के वक्त कुल चार रकात होती है सबसे पहले दो रकात सुन्नत फिर दो रकात फ़र्ज़ होती है.

2.दो रकात सुन्नत की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत फज़र की अल्लाह ताआला के लिए सुन्नत रसूल अल्लाह की मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

3.दो रकात फर्ज की नियत किस तरह किया जाता है ?


ans.नियत की मैंने दो रकात नमाज़ फज़र की अल्लाह ताआला की लिए (मुक्तदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के) मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

4.जोहर के वक्त कुल कितनी नमाज़ पढ़ी जाती है?

ans.जोहर के वक्त कुल 12 रकात नमाज़ पढ़ी जाती है सबसे पहले चार रकात सुन्नत फिर चार रकात फर्ज और फिर दो रकात सुन्नत फिर दो रकात नफिल.

5.चार रकात सुन्नत की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने चार रकात नमाज़ सुन्नत जोहर की अल्लाह ताआला के लिए सुन्नत रसूल अल्लाह की मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

6.फिर चार रकात फर्ज की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने चार रकात नमाज़ फज़र जोहर की अल्लाह ताआला के लिए (मुक्तदी इतना और कहे,,पीछे इस इमाम के)मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

7.फज़र की दो रकात सुन्नत नमाज़ की नियत किस तरह की जाती है?

ans नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत जोहर की अल्लाह ताआला के लिए सुन्नत रसूल अल्लाह की मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

8.फज़र की दो रकात नफिल की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने दो रकात नमाज़ नफिल अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

9.असर के वक्त कुल किनते नमाज़ पढ़ी जाती है?

ans.असर के वक्त कुल 8 रकात नमाज़  पढ़ी जाती है सबसे पहले चार रकात सुन्नत फिर चार रकात फर्ज पढ़ी जाती है.

10.चार रकात सुन्नत की नियत किस तरह की जाती है?


ans.नियत की मैंने चार रकात नमाज़ सुन्नत असर की अल्लाह ताआला के लिए सुन्नत रसूल अल्लाह की मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

11.असर का चार रकात फर्ज की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने चार रकात नमाज़ फर्ज असर की अल्लाह के लिए (मुक्तदी इतना और कहे,,पीछे इस इमाम के) मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

12.मगरिब के वक्त कुल कितनी रकात नमाज़ पढ़ी जाती है?

ans.मगरिब के वक्त कुल 7 रकात नमाज़ पढ़ी जाती है सबसे पहले तिन रकात फर्ज फिर दो रकात सुन्नत और फिर दो रकात नफिल पढ़ी जाती है.

13.मगरिब की तिन रकात फर्ज की नियत किस की जाती है?

ans.नियत की मैंने तिन रकात नमाज़ फर्ज मगरिब की अल्लाह ताआला के लिए (मुक्तदी इतना और कहे,,पीछे इस इमाम के) मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

14.मगरिब की दो रकात सुन्नत की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत मगरिब की अल्लाह ताआला के लिए(सुन्नत रसूल अल्लाह की)मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

15.मगरिब की दो रकात नफिल की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने दो रकात नफिल अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

16.इसा के वक्त कुल कितनी रकात नमाज़ पढ़ी जाती है?

ans.इसा के वक्त कुल 17 रकात नमाज़ पढ़ी जाती है सबसे पहले चार रकात सुन्नत,फिर चार रकात फर्ज,फिर दो रकात सुन्नत, फिर दो रकात नफिल, उस के बाद तिन रकात वित्र  वाजिब फिर दो रकात नफिल पढ़ी जाती है

17.इसा की चार रकात सुन्नत की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने चार रकात नमाज़ सुन्नत इसा की अल्लाह ताआला के लिए सुन्नत रसूल अल्लाह की मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

18.इसा की चार रकात फर्ज की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने चार रकात नमाज़ फर्ज इसा की अल्लाह ताआला के लिए (मुक्तदी इतना और कहे,पीछे इस इमाम के)मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

19.इसा की दो रकात सुन्नत की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने दो रकात नमाज़ सुन्नत इसा की अल्लाह ताआला के लिएसुन्नत रसूल की मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

20.इसा की दो रकात नफिल की नियत किस तरह की जाती है?

ans.नियत की मैंने दो रकात नमाज़ नफिल अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

21.इसा की तिन रकात वित्र की नियत की तरह की जाती है?


ans. नियत की मैंने तिन रकात नमाज़ वाजिब वित्र की अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

22.इसा की दो रकात नफिल की नियत किस तरह की जाती है?

ans नियत की मैंने दो रकात नमाज़ नफिल अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

23.अगर नियत के अल्फाज भूल कर कुछ के कुछ जुबान से निकल गई तो नमाज़ होगी या नहीं?

ans.नियत दिल के पक्के इरादे को कहते है यानि नियत में जुबान का एतबार नहीं तो अगर दिल में मसलन जोहर का इरादा किया और जबान से लफ्ज असर निकल गया तो जोहर की नमाज़ हो जाएगी.

24.कज़ा नमाज़ की नियत किस तरह की जाती है?

ans.जिस रोज और जिस वक्त की नमाज़ कज़ा हो उस रोज उस वक्त की नियत कज़ा में जरुरी है मस्ल्लन अगर जुम्मा के रोज फज़र की नमाज़ कज़ा हो गई तो इस तरह नियत करे के नियत की मैंने दो रकात नमाज़ कज़ा जुम्मा के फज़र फर्ज की अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर.

25.अगर कई साल की नमाज़े कज़ा हो तो नियत किस तरह की जाती है?

ans.ऐसी सूरत में जो नमाज़ मस्ल्लन जोहर की कज़ा पढनी है तो इस तरह नियत करे नियत की मैंने चार रकात नमाज़ कज़ा जो मेरे जिम्मा बाकि है इन में से पहले जोहर फर्ज की अल्लाह ताआला के लिए मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाह हुअक्बर  इसी पर दुसरे कज़ा नामजो की नियतो की पढनी चाहिए.

26.पांच वक्त के नामजो में कुल कितनी रकात कज़ा पढ़ी जाती है?

ans.20 रकात -दो रकात पज़र,चार रकात जोहर,चार रकात असर,तिन रकात मगरिब,चार रकात इसा,और तिन रकात वित्र,खुलासा ये के फर्ज और वित्र की कज़ा है सुन्नत नामजो की कज़ा नहीं.

27.पांचो वक्त की अदा नामजो में कुछ कमी हो सकती है या नहीं?

ans.फज़र की नमाज़ में कमी नहीं हो सकती अलबता अगर जोहर में सिर्फ चार रकात सुन्नत, चार रकात फर्ज और दो रकात सुन्नत यानि कुल 10 रकात पढ़े और असर में सिर्फ चार रकात फर्ज अदा करे- और मगरिब में तिन रकात फर्ज और दो रकात सुन्नत यानि कुल 5 रकात पढ़े,और इसा में सिर्फ चार रकात फर्ज,दो रकात सुन्नत फिर तिन रकात वित्र यानि कुल 9 रकात अदा करे तो ये भी जाईज है कोई हर्ज नहीं

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