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Pani ka bayan in Islam

पानी का बयान | Pani ka bayan in hindi

जिन जिन पानियों से वुज़ू जाइज़ है उन से ग़ुस्ल भी जाइज़ है । और जिन जिन पानियों से वुज़ू नाजाइज़ है उन से ग़ुस्ल भी नाजाइज़ है ।

किन किन पानियों से वुज़ू जाइज़ है ?

बारिश , नदी , नाले , चश्मे , कुंएं , तालाब , समुन्दर , बरफ , ओले के पानियों से वुज़ू और ग़ुस्ल करना जाइज़ है । बशर्तेकि ये सब पानी पाक हों ।

  किन पानियों से वुज़ू जाइज़ नहीं ?

फलों और पेड़ों का निचोड़ा हुआ पानी , या वह पानी जिस में कोई पाक चीज़ मिल गई और पानी का नाम बदल गया । जैसे पानी में शकर मिल गई और वह शरबत कहलाने लगा । या पानी में चन्द मसाले मिल गए और वह शोरबा कहलाने लगा | या बड़े हौज़ और तालाब में कोई नापाक चीज़ इस क़दर ज़्यादा पड़ गई कि पानी का रंग या बू या मज़ा बदल गया । या छोटे हौज़ या बालटी या घड़े में कोई नापाक चीज़ पड़ गई । या कोई ऐसा जानवर गिर कर मर गया जिस के बदन में बहता हुआ खून होता है । अगरचे पानी का रंग या बू या मज़ा न बदला हो । या वह पानी जो वुज़ू या ग़ुस्ल का धोवन हो । इन सब पानियों से वुज़ू और ग़ुस्ल करना जाइज़ नहीं । ( आलमगीरी , दुर्रे मुख्तार , रद्दुल मुहतार )

मसलाः – पानी में अगर कोई ऐसा जानवर गिर  कर मर गया हो जिस के बदन में बहता हुआ ख़ून नहीं होता । जैसे मक्खी , मछर , भिड़ , शहद की मक्खी , बिच्छू बरसाती कीड़े मकोड़े तो इन जानवरों के मरने से पानी नापाक नहीं होता और उस पानी से वुज़ू और  ग़ुस्ल करना जाइज़ है । ( आलमगीरी स. 23 )

मसला : – अगर पानी में थोड़ा साबुन मिल गया जिस से पानी का रंग बदल गया तो उस पानी से वुज़ू और ग़ुस्ल जाइज़ हैं लेकिन अगर इस कदर ज्यादा साबुन पानी में घोल दिया गया कि पानी सत्तू की तरह गाढ़ा हो गया । तो उस पानी से वुज़ू और ग़ुस्ल जाइज़ नहीं होगा ।  ( आलमगीरी जि . 1 स 20 )

मसला : – जो जानवर पानी ही में पैदा होते है और पानी ही में जिन्दगी बसर करते हैं जैसे मछलियां और पानी के मेंढक वगैरह उनके पानी में मर जाने से पानी नापाक नहीं होता । बल्कि उससे वुज़ू और ग़ुस्ल जाइज़ है । ( आलमगीरी जि . 1 से 23 )

मसला : – दस हाथ लम्बा दस हाथ चौड़ा जो हौज़ हो उसे दह दर दह और बड़ा हौज़ कहते हैं । यूं ही बीस हाथ लम्बा पांच हाथ चौड़ा कुल लम्बाई चौड़ाई सौ हाथ हो । और अगर गोल हो तो उसकी गोलाई तकरीबन साढ़े पैतीस हाथ हो । और अगर लम्बाई चौडाई सौ हाथ न हो उस हौज़ को छोटा हौज़ कहते हैं अगरचे कितना ही गहरा हो । बड़े हौज़ में अगर कोई नजासत पड़ गई तो वह उस वक्त तक पाक माना जाएगा , जब तक कि उस नजासत के असर से उसके पानी का रंग या बू , या मज़ा न बदल जाये । और छोटा हौज़ एक क़तरा नजासत पड़ जाने से भी नापाक हो जाएगा ।

मसला : – जो पानी वुज़ू या ग़ुस्ल करने में बदन से गिरा वह पाक है । मगर उससे वुज़ू और ग़ुस्ल जाइज़ नहीं । यूं ही वुज़ू में अगर बे वुज़ू शख़्स का हाथ या उंगली या पूरा नाखुन या बदन का कोई टुकड़ा जो वुज़ू में धोया जाता हो बक़स्द या बिला क़स्द दह दर दह से कम पानी में बे धोये पड़ जाये तो वह पानी वुज़ू और ग़ुस्न के लाइक न रहा । इसी तरह जिस शख्स पर नहाना फ़र्ज़ है उसके जिस्म का कोई बे धुला हुआ हिस्सा पानी से छू जाये तो वह पानी वुज़ू और गुस्ल के काम का न रहा । अगर धुला हुआ हाथ या बदन का कोई हिस्सा पानी में पड़ जाये तो कोई हरज नहीं । ( बहारे शरीअत वग़ैरह )

मसलाः – अगर हाथ धुला हुआ है मगर फिर धोने की नीयत से पानी में  डाला और यह धोना सवाब का काम हो जैसे खाने के लिए या वुज़ू के लिए तो यह पानी इस्तेमाल किया हुआ हो गया । यानी वुज़ू के काम का न रहा और उसका पीना भी मकरूह है । ( बहारे शरीअत जि 2 स 49 ) इस मसले का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए । अ़वाम तो अवाम बाज ख्वास भी इस मसले से गाफिल हैं ।

मसलाः – इतने जोर से बहता हुआ पानी कि उसमें तिनका डाला जाये तो उसको बहा ले जाये , नजासत के पड़ जाने से नापाक नहीं होगा । लेकिन अगर इतनी ज्यादा नजासत पड़ जाये कि वह नजासत पानी के रंग या बू या मज़ा को बदल दे तो इस सूरत में बहता हुआ पानी भी नापाक हो जाएगा । और अब यह पानी उस वक्त पाक होगा कि पानी का बहाव सारी नजासत को बहा ले जाये । और पानी का रंग और बू मज़ा ठीक हो जाये ।

मसलाः – तालाब और दस हाथ लम्बा और दस हाथ चौडा हौज़ भी बहते हए पानी के हुक्म में है । यह भी थोड़ी सी नजासत पड़ जाने से नापाक नहीं होगा । लेकिन जब उसमें इतनी नजासत पड़ जाये कि पानी का रंग या बू या मज़ा बदल जाये तो नापाक हो जाएगा ।

मसलाः – नापाक पानी को खुद भी इस्तेमाल करना हराम है । और जानवरों को भी पिलाना नाजाइज है । हां गारे वगैरह के काम में ला सकते हैं । मगर उस गारे मिट्टी को मस्जिद में लगाना जाइज नहीं ।

मसलाः – नापाक पानी बदन या कपड़े या जिस चीज में भी लग जाये वह नापाक हो जाएगा । उसको जब तक पाक पानी से धोकर पाक न कर लें पाक नहीं होगा । ( वहारे शरीअत वगैरह , आम्मए कुतुब )

मसलाः – पानी में बिला धुला हुआ हाथ पड़ गया या किसी और तरह । मुस्तअमल हो गया और यह चाहें कि यह काम का हो जाये तो अच्छा पानी उससे ज्यादा उसमें मिला दें । नीज उसका तरीका यह भी है कि उसमें एक तरफ से पानी डालें ‘ के दूसरी तरफ से बह जाये । सब काम का हो जाएगा । यूं ही नापाक पानी को भी पाक कर सकते हैं । ( बहारे शरीअत जि . 2 स . 49 )

मसला : – नाबालिग का भरा हुआ पानी कि शरअन उसकी मिल्क हो जाये उसे पीना या वुज़ू या ग़ुस्ल या किसी काम में लाना उसके मां बाप या जिस का वह नौकर है उसके सिवा किसी को जाइज नहीं । अगरचे वह इजाजत भी देदे | अगरचे उस से वुज़ू हो जाएगा और गुनहगार होगा । यहां से मुअल्लिमीन को सबक लेना चाहिए कि अक्सर वह नाबालिग बच्चों से पानी भरवा कर अपने काम में लाया करते हैं । याद रखना चाहिए कि नाबालिग हिबा सही नहीं है । इसी तरह किसी बालिग का भरा हुआ पानी भी बगैर उसकी इजाज़त के खर्च करना हराम है । ( बहारे शरीअत जि . 2 स . 50 )

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
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