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Roza Rakhne Ki Dua Hindi, English and Arabic | Sehri ki Dua

Roza Rakhne Ki Dua

Dua of Sehri with Arabic, English, Hindi & Urdu Translation. Roza Rakhne Ki Dua kia hai.

Roza Rakhne ki niyat agar dil mein bhi kar li jaae aur niyat ko muh se na bola jaye to bhi kaafi hai lekin agar koi chahe to muh se bhi bol sakta hai.

अगर आप Roza Rakhne Ki Dua हिंदी, अरबी और अंग्रेजी में जानना चाहते हैं तो यह आपके लिए एक बेहतरीन लेख है ! उसके अलावा आपको इस लेख में सहरी और इफ्तार से संबंधित जरूरी जानकारी भी आपको इस लेख में मिलेगा ! Roza ki niyat के लिए इस लेख को आखिर तक पढ़ें !

सहरी में इन बातों का जरूर रखें ध्यान

सहरी का खाना फज्र की नमाज़ से पहले खाया जाता है और फज्र के आजान के बाद कुछ भी खाया और पिया नहीं जा सकता है ! सहरी करना सुन्नत है, अगर किसी को भूख नहीं है तो उसे 2-3 खजूर और पानी जरूर पी लेना चाहिए !
अगर कोई सहरी के समय नींद में रह जाता है और बाद में उठने पर वह कुछ खा और पी नहीं सकता है लेकिन लेकिन केवल बीटा के पत्ते को चबाता है, तो उसे सहरी का सवाब मिलेगा। जहां तक ​​संभव हो, सेहरी को देरी लेना चाहिए, लेकिन फज्र की नमाज से 10 मिनट पहले पूरा कर लेना चाहिए ! ताकि अपने दांतो में फंसे खाने को वह सही से निकाल सके !
सहरी में ज्‍यादा तला, मसालेदार, मीठा खाना नहीं लेना चाहिए ! सहरी के खाने में दूध, दही, फल और खजूर को जरूर शामिल करना चाहिए !
अगर कोई इंसान रमज़ान के महीने में जानबूझ कर, रमजान के रोजे़ के अलावा किसी दूसरे रोजे की नियत करता हो, वह रोजा कबूल नहीं होगा और उसका वह रोजा भी खराब हो जाएगा !
रोजा रखने की दुआ को मुंह से पढ़ना हमेशा बेहतर माना गया है ! लेकिन कोई रोजा रखने के लिए (आज मैं रोजा रखूंगा या कल मैं रोजा रखूंगा) इतना भी नियत कर ले तो उसका रोजा हो सकता है ! सहरी का खाना और पीना पूरा करने के बाद दुआ पढ़ना चाहिए !

(Roza Rakhne Ki Dua in Arabic) !

وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتَ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ

 

Roza Rakhne Ki Dua in English / Sehri Ki Dua!

(“Wa bisawmi ghadinn nawaiytu min shahri ramadan”)

(English Meaning: I intend to keep the fast for the month of Ramadan)

रोजा की नियत हिंदी में ! Roza Rakhne Ki Dua Hindi Mein – हिन्दी में रोजा रखने की दुआ

(‘’ व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमजान ’’)

(Meaning: मैं रमजान के महीने के लिए उपवास रखने का इरादा रखता हूं)

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सेहरी मेरे क्या खाए !

खजूर
खजूर में आयरन के साथ कई पोषक तत्व पाएं जाते हैं। सेहरी में खजूर खाने से दिन भर कमजोरी का अहसास नहीं होता।

पानी
सेहरी के टाइम कम से कम दो से तीन गिलास पानी जरूर पीएं। इसके अलावा शरीर को कमजोरी या मोटापे से बचाने के लिए इफ्तार से सेहरी के बीच भी खूब पानी पीना चाहिए। ऐसा करने से आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।

दूध-दही
सेहरी में कैल्शियम जरूर शामिल करना चाहिए। इसके लिए दूध या दही लेने से आपको पूरे दिन प्यास नहीं लगेगी।

फल-सब्जी
रोजे में फल और सब्जी खाने से आपको भूख नहीं लगेगी क्योंकि ये धीरे-धीरे पचती हैं। साथ ही शरीर को भी तरलता मिलती है।

 

रोजा में ये चीजें बिलकुल ना करें

  • रोजे की सबसे पहली शर्त है भूखे रहना. मतलब सुबह जब सबसे पहली अजान होती है उस वक्त से लेकर शाम में सूरज डूबने तक कुछ भी नहीं खाना है ना ही पीना. कुछ नहीं मतलब कुछ भी नहीं. सिगरेट, जूस, चाय, पानी कुछ भी नहीं.
  • इस्लाम में शराब हराम है, मतलब शराब पीना गुनाह माना जाता है. इसलिए रोजे के दौरान भी शराब का सेवन की एकदम मनाही है.
  • दूसरों की बुराई या झूठ बिलकुल भी ना बोलें
  • लड़ाई, झगड़ा, गाली देना इन सब चीजों से रोजा टूट जाता है
  • शारीरिक संबंध बनाना भी मना है
  • किसी भी औरत या मर्द को गलत नजर से देखना भी मना
  • जानबूझ कर उल्टी करने से भी रोजा टूट जाता है

 

रमजान मैं क्या करे

ज्यादा से ज्यादा अल्लाह को याद करें. नमाज और क़ुरान पढ़ें. क्योंकि इस महीने में जो इबादत की जाती है, आम दिनों के मुकाबले ज्यादा बरकत देती है.

  • एक दूसरे की मदद करें
  • जकात और फितरा दें. मतलब गरीब को ज्यादा से ज्यादा दान करें
  • रोजेदारों को इफ्तार कराएं
  • मिस्वाक (दातुन) करना
  • सेहरी (सुबह के वक्त का खाना) का इंतजाम करें, मतलब सुबह सूरज निकलने से पहले कुछ खाएं और दूसरों को भी खिलाएं

इन हालत में रोजे में छूट

  • बीमार के लिए माफी- अगर कोई बीमार है, जिसमें डॉक्टर ने भूखे रहने से मना किया है. या फिर वो कुछ ऐसी दवा खा रहा है जिसे छोड़ने से उसकी बीमारी बढ़ जाएगी तो वो रोजा छोड़ सकता है.
  • यात्रा के दौरान छोड़ सकते हैं रोजा- कोई लंबी यात्रा पर है और अगर रोजा रखने में परेशानी आ सकती है तो रोजा छोड़ा जा सकता है. लेकिन छोड़े हुए रोजे का बदला बाद में रोजा रख कर पूरा करना होगा.
  • प्रेग्नेंट औरतें को छूट- प्रेग्नेंट औरतें या नई-नई मां बनने वाली महिलाएं, जो बच्चे को दूध पिलाती हैं, वह भी रोजा नहीं रख सकतीं हैं
  • बुजुर्ग और छोटे बच्चों को भी रोजा रखने में छूट दी गई है.

इन हालातों में नहीं टूटते हैं रोजे

रोजा को लेकर कई तरह के भ्रम सामने आते रहते हैं. किन हालातों में रोजा टूट जाता है किन हालातों में नहीं? आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ धारणाओं और मान्यताओं के बारे में.

  • गलती से कुछ खा लेने से नहीं टूटता है रोजा- कई बार इंसान ये भूल जाता है कि वो रोजा है और ऐसे में गलती से कुछ खा लेता है, तो इस हालत में रोजा नहीं टूटेगा. लेकिन इसके लिए शर्त है कि अगर खाने के बीच में ही आपको याद आ जाए कि आप रोजा हैं तो खाना तुरंत छोड़ देना होगा.
  • नहाने के दौरान पानी का नाक या मुंह में जाना- कई बार नहाने के वक्त पानी मूंह या नाक में चला जाता है तो ऐसे मौके पर रोजा टूटता नहीं है, लेकिन जानबूझ कर पानी पी लेने से रोजा टूट जाएगा
  • अपना थूक निगलने से नहीं टूटता है रोजा
  • नाखुन काटने या बाल दाढ़ी बनाने से भी नहीं टूटता है रोजा

रोजा इन वजहों से नहीं टूटता है

  1. गलती से या बिना जाने थूक और बलगम निगल जाने से
  2. दांतों से निकला खून, हलक में न जाए तो
  3. नीम के डंडी से मिस्वाक करने पर
  4. अतर की खुशबू सूंघने से
  5. आंखों या कानों में दवा डालने से
  6. किसी रोजेदार के मुंह में जबरदस्ती खाना डालने से
  7. गलती से या भूल से कुछ खा-पी ले तो
  8. लजीज खाने के बारे में सुनकर मुंह में पानी आने से
  9. सर व शरीर पर तेल लगाने से रोजा नहीं टूटता है, आदि.

रोजा इन वजहों से टूट सकता है

  1. रोजे की हालत में कोई आदमी जानबूझकर कुछ खा या पी लेता हो, तो उसका रोजा टूट जाता है.
  2. कोई रोजेदार दांत में फंसे हुए खाने को जानबूझकर निगल जाता है या खा जाता हो, तो उसका रोजा टूट जाता है.
  3. उल्टी करने से रोजा टूट जाता है.
  4. गैरजरूरी इंजेक्शन लगवाने से भी रोजा टूट जाता है.
  5. किसी तरह की भी दवाई खाने-पीने से रोजा टूट जाता है.
  6. गलत कार्य करने, हम-बिस्तरी, चुगलखोरी करने और झूठ बोलने से रोजा टूट जाता है, आदि.

रोजा इन वजहों से मकरूह हो सकता है

  1. गाने बजाने और नाचने से
  2. दांत निकलवाने से
  3. टूथपेस्ट या मंजन से दांतो को ब्रश करने पर
  4. थूक या बलगम को निगल से
  5. गैर जरूरी चीजों को चबाने से
  6. पूरे शरीर में गीले कपड़े पहनने से
  7. शरीर के किसी भी हिस्से से खून निकलने से आदि.

 

Roza Rakhne Ka Tarika

Roza ek Allah ki ibadat hai jo Allah ne har kisi ko rakhne ka hukm diya hai (baccho aur beemaro ko chhod kar). Agar koi roza bina kisi badi wajah ke nahi rakhta to wo gunahgaar hoga. Isliye har kisi ko roza rakhna farz (zaruri) hai.

Islami calendar mein ek mahine ka naam ramzan hai, Ramzan saturday night se shuru ho jaega matlab sunday ko pehla roza hoga. Total 29-30 roza hote hain (agar chaand 29 ki raat ko dikh gaya to 29 hi honge aur nahi dikha to 30 roza rakhna zaruri hai) matlab roza kam se kam 29 ya zyada se zyada 30 hote hain. Roza khatam hote hi agle din eid hoti hai.

Roza kese Rakhe

Roza shuru ho raha hai iske liye subah jaldi uth kar (suraj nikalne se pahle) kuch kha pi len. Is time khana bhi sawab hai. Jitna dil kare utna kha len. Lekin kuch na kuch khana chahiye, kyon ke ye sunnat hai aur isse sawab bhi milta hai.
Phir suraj nikalne ke baad (subah ki azan hone ke baad) se kuch bhi khana peena nahi hai.

jab shaam ko suraj doob jata hai (us time jab azan ki awaz aa jaae) uske baad hi kuch kha-pee sakte hain (agar masjid se kahi door ho aur azan ki awaz na aae to time dekh kar bhi roza khola ja sakta hai), is time kha hi lena chahiye bhale hi kitna bhi busy ho, kyonke roza kholne mein der karna bhi galat hai. Agar khajoor (dates) se roza khola jaae to wo sabse behtar hai, dates na ho to paani se kholna chahiye, phir kuch dusri cheez khana chahiye, agar ye dono bhi na mile to phir kisi bhi cheez se khol lo.

Roza kholne ke time se pahle ke time khoob dua maango, kyonke ye time dua kubul hone ka khaas time hai, is time samandar ki machliya bhi rozdaaro ke liye dua karti hain aur Allah is time ki dua ko jaldi sunta hai.

Roza ka matlab ye nahi ke sirf khana-peenc chhod diya. balke har tarah ke gunah ko bhi chhodna hai jese jhoot, kisi ki peeth piche burai, gaali, jhagda, gussa, chori, music, jua ya jitni bhi burai hoti hain un sabse bhi bachna hai, agar roza rakh kar ye sab gunah karte rahe to roza makrooh (Allah ko na-pasand) ho jaega.

Roza rakhne wale ko 5 time ki namaz bhi padhna chahiye, aur dusri jitni Allah ki ibadat kare to wo bhi behtar hai.

Din mein kisi ko ye bhi nahi bolna chahiye ke mujhe bahut roza lag raha hai, ya bahut pyas lag rahi hai, jo feelings hai bas dil mein rakho. Muh mein kuch cheez mat daalo, jese kuch log barf ko muh mein daal lete hain (bhale hi usko khaate nahi) lekin aesa karna bhi galat hai. lekin wuzu karne ke liye muh mein paani daal sakte hain.

Lekin garara nahi karna chahiye kyonke usse paani halak ke neeche chale jaane ka dar hota hai, Lekin agar ye yaad na raha ke roza hai aur galti se kuch kha-pee liya (bhale hi bhar pet kha liya) to bhi roza nahi tutega, lekin agar kuch kha rahe hain aur roza yaad aa gaya to muh ka niwala bahar thook den, ya paani ho to bahar thook den, kyonke yaad aane ke baad andar le liya to roza toot jaaega.

Jab suraj doob jata hai aur roza khol liya jata to phir uske baad jitna chaho, jo chaho wo kha-pee sakte hain, aur subah ke suraj nikalne se pahle tak kha-pee sakte hain.

Agar kisi ko ghusal ki zarurat ho to subah jaldi se jaldi ghusal kar lena chahiye. Roza ki halat mein na-paak rahna theek nahi. Ladkiyo ko mahine ke dino mein roza nahi rakhna chahiye.

Allah hum sabko sahi tarike se roza rakhne ke taufik ata kare, aameen.

 

ROZE KE AADAB

==============================
(1) Roza sirf Allah ke liye rakhna
(matlab kisi ko dikhane ya taarif
paane ke liye roza na rakha jaae)
(2) Sahri karna chahe ek ghunt
pani se ho
(sehri karna sunnat hai, sehri
karne se sawab bhi milta hai aur
din bhar ke liye energy bhi.

(3) sahri derse karna
(Kuch log jaldi sehri kha kar so
jaate hain, ye galat hai, balke
sahri aakhri time par karna
chahiye)

(4) iftari jaldi karna
(jese hi azan ki awaz aae, ya time
ho chuka ho to foran roza khol le,
jaan-bujh kar deri na kare)

(5) Roza rakhne ke baad gunaho
se bachna
(wese to gunaho se hamesha hi
bachna chahiye, lekin roza ki
halat mein to kam se kam koi
gunah nahi karna chahiye, kyonke
jo roza rakh kar bhi jhoot bole ya gali de ya
kisi ko dhoka de to Allah aese
rozo ko qubul nahi karta aur insan
sirf bhuka-pyasa hi rah jata hai,
uska roza qubul nahi hota, isliye
hum halal cheezo ko (khane-
peene) ko Allah ke khaatir chhod
rahe hain to haram cheezo
(gunaho) ko bhi Allah ke khaatir
chhod de.

(7) Roza rakhne ke baad achchhe
kam zyada karna.
(acche kaam to hamesha hi karna
chahiye lekin roza rakhne ke baad
to zyada hi karna chahiye, kyonke
ramzan mein 1 neki ke 70 neki
likhi jaati hai, nafil ka sawab farz
ke barabar kar diya jata hai)

(8) Roza khajur se kholna, khajur
na mile to paani se kholna

(9) Roza kholne se pahle, roza
kholne ki dua padhna

(10) Dusre roza rakhne walo ko
roza iftaar karnawana.
(Agar kisi ne dusre roza rakhne
wale ko bhi iftaar karwaya to usko bhi
utna hi sawab milega jitna roza
rakhne wale ko mila, aur roza
rakhne wale ke sawab mein koi
kami na hogi)

Allah hum sabko amal ki taufik
ata kare, aameen.

Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.
mm
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mm
Asalam-o-alaikum , Hi i am noor saba from Jharkhand ranchi i am very passionate about blogging and websites. i loves creating and writing blogs hope you will like my post khuda hafeez Dua me yaad rakhna.