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Sadqa ye bhi hain…

ये भी सदका है

हदीस शरीफ में है कि आदमी के अन्दर 360 जोड़ हैं इसलिए ज़रूरी है कि हर जोड़ की तरफ से रोजाना एक सदका किया जाए——सहाबा कराम रज़ि अल्लाहो अन्हों ने अर्ज़ किया या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इसकी ताकत किसको है कि 360 सदकात रोज़ाना करे?
नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया कि:

मस्जिद में पड़ी थूक या कोई गन्दगी को हटा दो ये भी सदका है

रास्ते से कोई तकलीफ दह चीज़ को हटा दो यह भी सदका है

चास्त की दो रकात नफिल सबकी कायम मुकाम हो जाती है,इसलिए कि नमाज़ में हर जोड़ को अल्लाह तआला की इबादत में हरकत करनी पड़ती है

दो आदमियों में इन्साफ करा दो ये भी सदका है

किसी शख्स की सवारी पर सवार होने में मदद करा दो ये भी सदका है

सवार को सामान उठाकर दे दो ये भी सदका है

लाइलाहाइल्लललाह मुहम्मदुर्रसूल अल्लाह पढ़ना भी सदका है

हर वो कदम जो नमाज़ के लिए चले वो भी सदका है

किसी राहगीर को रास्ते की सही सिम्त बता देना भी सदका है

हर रोज़ा सदका है—-हज सदका है

सुब्हानअल्लाह,अल्हमदोलिल्लाह,अल्लाहु अकबर कहना ये भी सदका है

रास्ते में चलते हुए किसी को सलाम कर लेना भी सदका है

नेकी का हुक्म करना सदका है—–बुराई से रोकना भी सदका है

अपने अहलो अयाल(घरवालों) पर खर्च करना ये अज़ीम तरीन सदका है

कमज़ोर लोगों की दिलजोई करना ये भी सदका है

हर नेकी चाहे वो देखने में हकीर हो लेकिन सवाब में सदका है

मुसलमान भाई से मुस्कुराते हुए मिलना ये भी सदका है

किसी को दीनी मसला बताना या समझाना ये भी सदका है
हर नेकी सदका है लेकिन उसकी तासीर उस वक्त नज़र आती है जब बन्दा अपने ज़िम्मे जो हुकूक हैं वो अदा करे और अपना मामला अल्लाह तआला से दुरुस्त रक्खे, इसके बगैर नेकी अपनी बरकात ज़ाहिर नहीं कर सकती
इसलिए ऊपर लिखी हुई नेकियाँ जो सदका में शुमार की गई हैं इनमें वज़न और तासीर पैदा करने के लिए ज़रूरी है कि हम अल्लाह तआला हर नाफरमानी से बचें

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